
रांची। झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में लोकायुक्त और सूचना आयुक्त सहित अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति से संबंधित मामले में सोमवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के जवाब पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जल्द ही लोकायुक्त का नाम राज्यपाल को अनुमोदन के लिए भेजा जाए। अदालत ने कहा कि सरकार मामले में बार-बार समय ले रही है। जब नियुक्ति समिति ने लोकायुक्त के नाम की अनुशंसा कर दी है, तब फिर से समय मांगा जाना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि अगर दस दिनों में इसकी अधिसूचना जारी नहीं होती है, तो सख्त आदेश पारित किया जाएगा।



मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।इससे पहले महाधिवक्ता राजीव रंजन ने अदालत को बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं मिली है। इस पर अदालत ने उन्हें सरकार से जानकारी लेकर कोर्ट को अवगत करने का निर्देश दिया। दस मिनट बाद महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की है। चयन समिति ने लोकायुक्त के नाम की अनुशंसा कर दी है। दो-तीन दिनों में उक्त नाम राज्यपाल को अनुमोदन के लिए भेज दिया जाएगा। इसके अदालत ने पूछा कि सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर क्या अपडेट है।
तब प्रार्थी के अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत को बताया कि कुछ दिनों पहले सूचना आयुक्तों को नामों की सूची राज्यपाल को भेजी गई है। जिसे लौटा दिया गया। इस मामले में पक्ष-विपक्ष ने जानबूझकर ऐसे नामों की अनुशंसा की है, जो कानूनन सही नहीं है, ताकि नियुक्ति नहीं हो पाए। अभय मिश्रा ने यह भी कहा कि मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गईहै। ऐसे में बिना मुख्य सूचना आयुक्त के सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करने से संस्था संचालित नहीं होगी। बता दें कि इसको लेकर झारखंड एडवोकेट एसोसिएशन और राजकुमार की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
जिसमें कहा गया है कि लोकायुक्त और सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने की वजह से जनहित के कई मुद्दों पर सुनवाई लंबित हैं। पिछले आठ सालों से सरकार बार-बार नियुक्ति की प्रक्रिया जारी रहने की बात कहती रही है।

