
रांची। हाई कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट के कार्यकारी न्यायाधीश और न्यायाधीश नवनीत कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी होने के बाद 28 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखा लिया था। हेमंत सोरेन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ईडी जिस जमीन की बात कर रहा है, वह जमीन उनके नाम कभी रही ही नहीं। फैसला सुनाने में देरी होने पर हेमंत सोरेन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जिस पर 6 मई को सुनवाई होनी है।



प्रोविजनल बेल पर भी होगी सुनवाई : इधर, तीन दिन के प्रोविजनल बेल के लिए दायर हेमंत सोरेन की याचिका पर भी शुक्रवार को जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय की कोर्ट में सुनवाई होगी। ईडी कोर्ट ने पहले उनकी याचिका खारिज कर दी थी।
हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय ने 31 जनवरी को रांची से उनके ही आवास से गिरफ्तार कर लिया था। उन पर अवैध तरीके से जमीन खरीदने का आरोप है। पीएमएलए कोर्ट में ईडी उनके खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि 16 अगस्त 2023 को अंचलाधिकारी बड़गाईं को राजकुमार पाहन की ओर से उनकी जमीन पर कब्जे की शिकायत के बाद आनन-फानन में 29 जनवरी 2024 को एसएआर कोर्ट ने अंतिम रूप से राजकुमार पाहन को उक्त जमीन का मालिकाना हक दे दिया। यह मालिकाना हक भी उन्हें दिल्ली में हेमंत सोरेन के आवास पर ईडी की छापेमारी के बाद दिया गया। पहले समन के बाद ही तत्कालीन सीएम हेमंत सोरेन ने अपने पावर का उपयोग करते हुए इस केस से संबंधित साक्ष्य को नष्ट करने की कोशिश की है। पूछताछ के लिए हेमंत सोरेन को 10 समन जारी किया था, जिसमें से वह मात्र दो समन में ही ईडी के समक्ष उपस्थित हुए थे।

