
गांधीनगर। गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक आज बहुमत से पारित हो गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात यूसीसी लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। बिल पारित होने के बाद सदन में सत्तापक्ष के सदस्यों ने समर्थन जताते हुए ह्लजय श्री रामह्व के नारे लगाए और मेज थपथपाकर स्वागत किया। सदन में बिल के विरोध में विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाएं। वहीं सत्तापक्ष के सदस्यों ने इस बिल को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाला बताया।



गुरुवार को विधानसभा में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समान नागरिक संहिता विधेयक पेश किया। जिसके बाद सदन में 7 घंटे में लंबी चर्चा हुई। चर्चा के दौरान हलाला प्रथा, शाह बानो केस, अभिनेता धर्मेंद्र के दूसरे विवाह और श्रद्धा वाकर जैसे मामलों का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि माइनॉरिटी कम्युनिटी में पुरखों से शादी एक परंपरा है, लेकिन इस बिल का कानून माइनॉरिटी कम्युनिटी पर लागू नहीं होगा। हम बराबरी, न्याय और एकता के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करेंगे। हमारे देश की संस्कृति हमें परिवार की भावना सिखाती है। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात के लिए सतर्क है कि जातिगत भेदभाव न हो। शादी का जरूरी रजिस्ट्रेशन, तलाक के एक जैसे नियम, पेनल्टी समेत कुछ जरूरी प्रॉविजन होंगे। शादी का रजिस्ट्रेशन न कराने वालों को सजा देने का प्रॉविजन है।
उन्होंने कहा कि राज्य के सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून होगा। जो लोग अपनी शादी रजिस्टर नहीं करवाएंगे, उन पर दस हजार रुपये का जुमार्ना लगेगा और एक से ज्यादा बार शादी करने वालों को चार साल की जेल होगी। कोर्ट के बाहर तलाक अमान्य होगा और यह सजा के दायरे में आएगा। लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 3 महीने के अंदर रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

