
पटना। बिहार में संगठित अपराध के जरिए अवैध संपत्ति बनाने वाले माफिया गिरोह आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) के निशाने पर हैं। ईओयू राज्य के करीब आधा दर्जन गिरोह, अपराधकर्मियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। पहले चरण में जमीन और बालू के अवैध कारोबार से जुड़े करीब गिरोहों को चिह्नित किया गया है। इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर व्यापक छापेमारी की जाएगी। इसके बाद अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू होगी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार ईओयू ने ऐसे संगठित गिरोहों की पहचान के लिए तय मानकों के आधार पर सूची तैयार की है। कुछ समय पूर्व पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट मांगी थी। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न प्रकार के संगठित अपराधों में सक्रिय गिरोहों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है। कार्रवाई से पहले यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी गिरोह के कम से कम दो सदस्य एक ही तरह के अपराध, जैसे अवैध जमीन कारोबार या अवैध खनन, के मामलों में आरोपित रहे हों।
साथ ही उनके खिलाफ दर्ज मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुका हो या उन्हें न्यायालय से सजा मिल चुकी हो। ऐसे गिरोहों के आर्थिक नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है। उनके बैंक खातों, चल-अचल संपत्तियों और अवैध निवेश का ब्योरा जुटाया जा रहा है। संगठित अपराध पर प्रभावी कार्रवाई के लिए ईओयू में हाल ही में एक विशेष शाखा का गठन किया गया है। इसमें पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है।
इस शाखा को बिहार पुलिस और केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर अपराध सिंडिकेट की पहचान करने, उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने और अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने की जिम्मेदारी दी गई है।
इसी अभियान के तहत ईओयू ने पिछले महीने 13 जून को नालंदा जिले के रहुई निवासी संतोष डान और उसके गिरोह के 25 अन्य सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी।
हालांकि, उस दौरान संतोष डान गिरफ्तारी से बच निकला था। उसके खिलाफ पटना और नालंदा के विभिन्न थानों में 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

