
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इलेक्ट्रिक बस, एम्बुलेंस और ट्रक जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए 14,335 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें से पहली योजना 10,900 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली पीएम ई-ड्राइव योजना है जबकि दूसरी 3,435 करोड़ रुपये के बजट वाली पीएम-ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इन योजनाओं को मंजूरी दी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम ई-ड्राइव योजना प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़ा फैसला है। दो साल की अवधि वाली ह्यपीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना मार्च, 2024 तक लागू रहे फेम कार्यक्रम की जगह लेगी। फेम कार्यक्रम को हाइब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों के त्वरित क्रियान्वयन एवं विनिर्माण के लिए अप्रैल, 2015 में शुरू किया गया था।



पीएम ई-ड्राइव योजना 24.79 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों, 3.16 लाख ई-तिपहिया वाहनों और 14,028 ई-बसों का समर्थन करेगी। पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 88,500 चार्जिंग स्टेशनों को भी समर्थन मुहैया कराया जाएगा। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के लंबी दूरी तय करने से जुड़ी चिंताएं दूर करने में मदद मिलेगी।
भारी उद्योग मंत्रालय इस योजना के तहत मांग प्रोत्साहन का लाभ उठाने के लिए ई-वाउचर पेश करेगा। ईवी की खरीद के समय इस योजना के पोर्टल से खरीदार आधार-प्रमाणित ई-वाउचर हासिल कर सकेगा। नई योजना में इलेक्ट्रिक दोपहिया, इलेक्ट्रिक तिपहिया, ई-एम्बुलेंस, ई-ट्रक और अन्य उभरते इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने के लिए 3,679 करोड़ रुपये की सब्सिडी/मांग प्रोत्साहन की पेशकश की गई है। इस योजना के तहत राज्य परिवहन उपक्रमों और सार्वजनिक परिवहन एजेंसियों की तरफ से 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 4,391 करोड़ रुपये की राशि रखी गई है।
स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा के क्षेत्र में सक्रिय सीईएसएल 40 लाख से अधिक आबादी वाले नौ शहरों में परिवहन मांग का आंकड़ा तैयार करेगी। इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद शामिल हैं। राज्यों के परामर्श से अंतर-शहरी और अंतरराज्यीय ई-बसों को समर्थन दिया जाएगा। इसके अलावा ई-एम्बुलेंस की तैनाती के लिए 500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यह मरीजों के आरामदायक परिवहन के लिए ई-एम्बुलेंस का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए सरकार की एक नई पहल है। वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने के लिए भी पीएम ई-ड्राइव योजना में 500 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई है।
इस योजना में इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहनों के लिए 22,100 फास्ट चार्जर, ई-बसों के लिए 1,800 फास्ट चार्जर और इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए 48,400 फास्ट चार्जर लगाने का प्रस्ताव है। चार्जिंग स्टेशनों के लिए परिव्यय 2,000 करोड़ रुपये होगा। वैष्णव ने कहा कि यह पूरा कार्यक्रम सतत विकास और यह सुनिश्चित करने में बड़ा मददगार होगा कि हमारा देश इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की दिशा में तेजी से आगे बढ़े।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन प्राधिकरणों (पीटीए) द्वारा ई-बसों की खरीद और संचालन के लिए पीएम-ई-बस सेवा-भुगतान सुरक्षा तंत्र (पीएसएम) योजना के तहत 38,000 ई-बसों को लाने के लिए 3,435 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह योजना वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2028-29 तक 38,000 से अधिक ई-बसों की तैनाती का समर्थन करेगी। यह योजना तैनाती की तारीख से 12 साल तक की अवधि के लिए ई-बसों के संचालन का समर्थन करेगी। बयान के मुताबिक, पीएसएम योजना एक समर्पित कोष के जरिये वाहन विनिमार्ताओं/ आॅपरेटरों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करेगी। पीटीए द्वारा भुगतान में चूक की स्थिति में, कार्यान्वयन एजेंसी सीईएसएल योजना निधि से आवश्यक भुगतान करेगी, जिसे बाद में पीटीए/राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा वसूल किया जाएगा। इससे पहले सरकार ने दो चरणों में फेम योजना को लागू किया था। फेम-1 और फेम-2 के तहत लगभग 16 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों को वित्तीय समर्थन दिया गया।
आयुष्मान भारत स्कीम का बढ़ा दायरा : केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 70 साल और उससे ज्यादा उम्र के नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई योजना को 3,437 करोड़ रुपये के बजट की मंजूरी दी गई है। इसका लक्ष्य वरिष्ठ नागरिकों के लिए यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज प्रदान करना है। इस योजना से 4.5 करोड़ परिवारों और 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को लाभ होगा। जिन परिवारों को पहले से ही इस योजना के तहत कवर किया गया है, उनके लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का अतिरिक्त टॉप-अप उपलब्ध है। जबकि जो पहले कवर नहीं थे, उन्हें साझा कवरेज में प्रति वर्ष 5 लाख रुपये मिलेंगे।
हाइड्रोपावर के लिए 12,461 करोड़ : अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने 12,461 करोड़ रुपये के आवंटन और 31,350 मेगावाट की क्षमता वाली एक जलविद्युत योजना को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने के लिए बुनियादी ढांचे को बढ़ाना है। यह योजना सड़कों, पुलों, ट्रांसमिशन लाइनों और संचार सुविधाओं जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर देती है। इसका फोकस 133 गीगावाट की जलविद्युत क्षमता को विकसित करने पर है। इसमें परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता शामिल है – 200 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट और बड़ी परियोजनाओं के लिए 200 करोड़ रुपये और 0.75 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अगले चरण को हरी झंडी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 70,125 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है। इस योजना का लक्ष्य 62,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण करना है, जो ऐसी 25,000 बस्तियों को जोड़ेगा जिनका संपर्क नहीं था। साथ ही नई कनेक्टिविटी सड़कों पर पुलों का अपग्रेड करेगा।
मिशन मौसम के लिए बड़ा बजट : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मौसम की बेहतर निगरानी के लिए मिशन मौसम को भी मंजूरी दी है। दो साल के लिए 2,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं। मिशन को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के 3 संस्थानों की ओर से लागू किया जाएगा। इनमें भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान और मध्यम दूरी के मौसम पूवार्नुमान के लिए राष्ट्रीय केंद्र शामिल हैं। सरकार के अनुसार, मिशन मौसम का फोकस सटीक और समय पर मौसम और जलवायु की जानकारी प्रदान करने के लिए समझ को बेहतर बनाना है।

