
बेंगलुरु। भारत का सिलिकॉन वैली कहलाता है कर्नाटक का बेंगलुरु। यहीं की एक टेक कंपनी से यह खबर निकली है। इस कंपनी की मुख्य लेखा अधिकारी या CAO, एंड्रिया (बदला हुआ नाम), को MD के नाम से व्हाट्सएप पर एक मैसेज आया। वह मैसेज कुछ इस तरह से दिख रहा था कि कंपनी के एमडी ने भेजा है। बस एंड्रिया ने 56 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पता चला कि मैसेज एमडी ने नहीं बल्कि धोखेबाजों ने भेजा था।
क्या हुआ वाकया
हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक साइबर धोखेबाजों ने एक टेक कंपनी के MD की प्रोफाइल पिक्चर और कंपनी का लोगो इस्तेमाल कर उस कंपनी के सीएओ को बीते 5 दिसंबर को एक मैसेज भेजा। उसमें लिखा था, “मैं MD हूं, एक प्रोजेक्ट फाइनल कर रहा हूं, 56 लाख रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट देने हैं। कंपनी के अकाउंट से पेमेंट करो।” एंड्रिया ने तत्काल दो अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए। बाद में शक होने पर MD को ईमेल किया, तो पता चला कि वह नंबर MD का नहीं था। यह भी खुलासा हुआ कि उन्होंने कोई मैसेज भी नहीं भेजा था। इसके बाद 6 दिसंबर को साउथ-ईस्ट CEN क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज हुई।
CFOs और CAOs के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ उसी टेक कंपनी के लिए ही नहीं बल्कि सभी कंपनियों के CFOs और CAOs के लिए एक चेतावनी है। चाहे बॉस के फोटो से व्हाट्सएप मैसेज क्यों नहीं आए, उस पर पैसे ट्रांसफर करने से पहले, उनसे फ़ोन पर या खुद बात करके पुष्टि ज़रूर करें। वरना, बेंगलुरु की इसी टेक कंपनी की तरह आप भी धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हैं। इस मामले में, धोखेबाजों ने MD के व्हाट्सएप अकाउंट की नकल करके CAO को जाल में फंसाया और 56 लाख रुपये हड़प लिए।
कई बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ पैसा
पुलिस इंस्पेक्टर ईश्वरनी PN और उनकी टीम ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में पता चला कि टेक कंपनी का पैसा कई बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ था। एक खाता हैदराबाद में साई कुमार के नाम पर था। DCP (साउथ-ईस्ट) सारा फ़ातिमा ने हैदराबाद पुलिस के साथ मिलकर कुमार को पकड़ा।
किसी दूसरे के नाम पर खोला था खाता
साई कुमार ने पुलिस को बताया कि उसने ग्रिशमा नाम की एक महिला के कहने पर खाता खोला था। ग्रिशमा उसे हर 10 लाख रुपये के लिए 10,000 से 15,000 रुपये कमीशन के रूप में देती थी। पुलिस ने ग्रिशमा के घर छापा मारा और उसे उसके साथियों समेत 8 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया।
