
पटना । बिहार विधानसभा में बजट सत्र के पहले दिन डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार 2024-25 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस दौरान उन्होने बताया कि बिहार की अर्थव्यवस्था बीते 12 सालों में साढ़े तीन गुना की रफ्तार से बढ़ी है। 2011-12 के 2.47 लाख करोड़ रुपये से 2023-24 में 8.54 लाख करोड़ रुपये हो गई है। जबकि 2023-24 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में मौजूदा कीमतों पर 14.5% और स्थिर मूल्य पर 9.5% की वृद्धि होने का अनुमान है। वर्ष 2023-24 के लिए राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) मौजूदा कीमतों पर 8,54,429 करोड़ रुपये और स्थिर कीमतों (2011-12) पर 4,64,540 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि बिहार में सभी क्षेत्रों – प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक में आर्थिक गतिविधियों का उस गति से विस्तार हुआ है जो राज्य को देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले राज्यों में से एक बनाता है। स्थिर कीमतों पर बिहार की जीएसडीपी की वृद्धि दर 2023-24 में 9.2 प्रतिशत होने का अनुमान है, जो बिहार को उच्च दर से विकास करने वाले राज्यों में शामिल कर देगी।
आर्थिक सर्वेक्षण पेश करने के बाद पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार दोहरे अंक में प्रगति कर रहा है। सिर्वेक्षण में कहा गया है कि बिहार की जीएसडीपी मौजूदा कीमतों पर 14.5 प्रतिशत और पिछले वर्ष की तुलना में 2023-24 में 9.2 प्रतिशत स्थिर (11-12 कीमतें) बढ़ने का अनुमान है। मौजूदा कीमतों पर राज्य की जीएसडीपी 10.9 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ी है, जो भारत की जीडीपी वृद्धि दर 10.70 से थोड़ा आगे है। वहीं मौजूदा कीमतों पर जीएसडीपी भारत की जीडीपी से 1.1 प्रतिशत अधिक दर से बढ़ने का अनुमान है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बजट सत्र के पहले दिन राज्य विधानसभा में सर्वेक्षण पेश करने के बाद कहा कि राज्य ने जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति जीएसडीपी में वृद्धि के माध्यम से महत्वपूर्ण आर्थिक विकास हासिल किया है। बिहार ने पिछले दो दशकों में महत्वपूर्ण आर्थिक विकास देखा है।
सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया है कि 2023-24 में राज्य के जीएसवीए में व्यापार और मरम्मत सेवाओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसका योगदान 14.8 प्रतिशत है, इसके बाद परिवहन, भंडारण और संचार, प्रसारण सेवाओं से 10.2 प्रतिशत और साथ ही आवास और पेशेवर सेवाओं के रियल एस्टेट स्वामित्व से 9.5 प्रतिशत योगदान है। चौधरी ने बताया कि बिहार की अर्थव्यवस्था का आकार 3.5 गुना बढ़कर 2011-12 के 2.47 लाख करोड़ रुपये से 2023-24 में 8.54 लाख करोड़ रुपये हो गया है
