
पटना। बिहार के जल संकट को दूर करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सूखे जलाशयों को पुनर्जीवित करने के लिए ‘गंगाजल आपूर्ति योजना’ को मंजूरी मिल गई है। इस योजना के तहत मानसून के दौरान गंगा के अतिरिक्त पानी को पाइपलाइनों के जरिए दक्षिण बिहार के जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा। जल संसाधन विभाग अब इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में जुट गया है, जिसका विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) अगले दो-तीन महीनों में तैयार हो जाएगा। इस पहल से न केवल नवादा, लखीसराय, जमुई और मुंगेर जैसे जिलों को सूखे से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई सुनिश्चित होगी।



पहले चरण में 6 जलाशयों का चयन : योजना के प्रथम चरण में राज्य के 23 में से 6 प्रमुख जलाशयों को चुना गया है। इनमें लखीसराय के बासकुंड और मोरवे, जमुई के अमृत श्रीखंडी, आंजन और गरही और मुंगेर का जालकुंड शामिल है। इन जलाशयों तक पानी पहुंचाने के लिए 132 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
जलाशयों में सालों भर पानी उपलब्ध रहने से किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी विकल्प मिलेगा। इससे न केवल गंगाजल की बर्बादी रुकेगी, बल्कि दक्षिण बिहार के गिरते भूजल स्तर (Water Level) में भी सुधार होगा। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि इस कार्ययोजना से मॉनसून के अतिरिक्त पानी का संचय होगा, जिससे जलाशयों का संकट स्थायी रूप से दूर हो जाएगा।
सूखे की मार झेल रहे जिलों को राहत
नवादा, जमुई, लखीसराय और मुंगेर जैसे जिले लंबे समय से जल संकट और सूखे की समस्या का सामना कर रहे हैं। इस योजना के कार्यान्वयन से इन क्षेत्रों के जलस्रोतों की स्थिति बेहतर होगी और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को भी लाभ मिलेगा। प्रथम चरण की सफलता के बाद शेष जलाशयों को दूसरे चरण में शामिल करने की योजना है।
