वाराणसी। वाराणसी में पिता की मौत की खबर सुनने के बाद भी चारों बेटों ने मुंह मोड़ लिया, तो बेटी ने बेटे का फर्ज निभाते हुए पिता को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया। झारखंड की रहने वाली पूजा अपने बुजुर्ग पिता के बीमार होने की खबर सुनकर उनकी सेवा के लिए काशी आ गई थीं। बुधवार को उनके पिता का निधन हो गया। पूजा ने अपने चारों भाइयों को इसकी सूचना दी, लेकिन घंटों बीत जाने के बाद भी कोई नहीं पहुंचा।

इसी बीच घटना की जानकारी समाजसेवी अमन कबीर को मिली। जब अमन मौके पर पहुंचे तो पूजा ने उनसे कहा कि भैया, पिता जी को घाट तक पहुंचा दीजिए। अमन ने बताया कि जब उन्होंने पूजा से परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में पूछा तो वह रो पड़ीं और बोलीं, आज मैं ही अपनी पिता की बेटी नहीं, बेटा हूं। इतना सुनते ही अमन ने तुरंत शव को वाहन से घाट तक पहुंचाया। वहां पूजा, अमन और उनके साथियों ने कंधा देकर शव को घाट पर नीचे तक पहुंचाया। अमन कबीर ने बताया कि उनकी संस्था द्वारा दाह संस्कार का पूरा इंतजाम किया गया। पूजा ने भारी मन से मुखाग्नि दी। आसपास मौजूद लोगों की आंखें पूजा की इस कहानी को सुनकर नम हो गईं।

पूजा के पिता मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले थे। काशी में वे फेरी लगाकर किसी तरह अपना पेट पाल रहे थे। अमन कबीर ने बताया कि एक बेटा प्रयागराज में और तीन बेटे काशी में ही कहीं रहते हैं, लेकिन पिता के अंतिम सफर में कोई भी नहीं पहुंचा। पूजा के पास भले ही पैसे न रहे हों, लेकिन पिता के प्रति अटूट प्यार और सम्मान का जज्बा उनके अंदर था। उन्होंने समाज को आईना दिखाया कि बेटियां आज बेटों से कम नहीं हैं।

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