
पटना। बिहार के सीतामढ़ी जिले के युवा किसान अभिषेक आनंद पहले केले की खेती के लिए चर्चित थे, तो अब केला का चिप्स बनाकर चर्चा में हैं। वे उन युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गए है, जो सरकारी/निजी नौकरी नहीं होने के कारण निराश रहते हैं, कोई काम करने के बजाए हाथ पर हाथ रख अपनी किस्मत को कोसते रहते हैं। युवा किसान अभिषेक गांव में खुद केले की खेती और केले का चिप्स तैयार करने के साथ गांव के कई किसानों को भी केले की खेती से जोड़कर अपने गांव को केले का हब बना दिए है।



अभिषेक ने कृषि से एमएससी करने के बाद किसानों को गन्ना का विकल्प तो दिया ही, दूसरी फसल से दो से तीन गुणा मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है, इसे भी कर दिखाया है। ढाई एकड़ से शुरू करने वाले यह युवा किसान आज आठ एकड़ में केले की खेती कर मुनाफा कमा रहा है। केले के खेत में मक्का और गोभी भी लगाते हैं। इससे केले की खेती की लागत मक्का और गोभी से प्राप्त हो जाती है, जबकि केला बेचकर दो गुणा से तीन गुणा तक मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं।
एक एकड़ में 1250 पौधे : युवा किसान अभिषेक बताया कि एक एकड़ में 1250 केले के पौधे लगते हैं। पौधा सहित खेत तैयार करने और फल की कटाई तक 1.25 लाख तक खर्च होते है। खर्च काटकर प्रति एकड़ 1.5 लाख से 2 लाख तक आमदनी हो जाती है। युवा किसान अब केले का चिप्स तैयार कर बाजार में उतार दिया है। करीब 15 लाख की लागत से प्लांट लगाया है, जिसकी उत्पादन क्षमता 52 मीट्रिक टन है। इसमें सरकार की ओर से 25 प्रतिशत अनुदान भी मिला है। महज 25 वर्ष की उम्र में अभिषेक आज एक सफल किसान के साथ ही सफल युवा उद्यमी के रूप में उभरे हैं।
चीनी मिल बंद होने पर आया आइडिया : अभिषेक ने बताया कि वर्ष 2019 में रीगा चीनी मिल बंद होने के बाद उसके पिता बहुत चिंतित थे। वे चाहते थे कि इसका बेहतर विकल्प किसानों को मिले, जो नकदी फसल के रूप में हो। काफी सोच विचार कर वर्ष- 2020 पाल में ढाई एकड़ में वैज्ञानिक पद्धति से केला की खेती शुरू किए। फिलहाल आठ एकड़ में केला है। वर्ष 2022 में आत्मा के सहयोग से गांव के 50 किसानों को अपने खेत में केला की खेती का प्रशिक्षण दिया। आज गांव में करीब 25 एकड़ में केला की खेती है। केला की खेती के लिए अभिषेक विभिन्न स्तरों पर पुरस्कृत भी हो चुके हैं। जिला उद्यान पदाधिकारी मोहम्मद नेयाज अहमद ने बताया कि जिले के किसानों को अभिषेक से प्रेरणा लेनी चाहिए।

