
जमशेदपुर। जमशेदपुर समेत राज्य के तमाम निजी विद्यालयों में शिक्षा के नाम पर होने वाली व्यावसायिक मनमानी पर जिला प्रशासन ने कड़ा प्रहार किया है। रांची समेत राज्य के तमाम जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में सोमवार को हुई जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक में कई निर्णय लिए गए। नए नियमों के तहत अब स्कूल प्रबंधन अपनी मर्जी से फीस में भारी वृद्धि नहीं कर सकेंगे और न ही अभिभावकों को खास दुकानों से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर कर पाएंगे। फीस वृद्धि पर 10% की ‘लक्ष्मण रेखा’जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी निजी विद्यालय एक शैक्षणिक सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल इससे ज्यादा बढ़ोतरी करना चाहता है, तो उसे जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।



उल्लंघन पर दंड का प्रावधान: आर्थिक दंड: नियमों को तोड़ने पर स्कूलों पर 50,000 रुपये से लेकर 2.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। मान्यता पर खतरा: गंभीर और बार-बार होने वाले उल्लंघन के मामलों में स्कूल की मान्यता रद करने की अनुशंसा भी की जा सकती है। पारदर्शिता: स्कूलों को पिछले तीन वर्षों का कक्षावार शुल्क विवरण और सत्र 2026-27 का पूरा ब्यौरा जिला समिति को सौंपना होगा। किताबों और यूनिफॉर्म के लिए अब ‘आजादी’ अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की हैं: किताबें: सीबीएसई स्कूलों में NCERT के अलावा अन्य निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को अनिवार्य नहीं किया जा सकेगा। पाठ्यक्रम में बदलाव न होने तक 5 साल से पहले किताबें नहीं बदली जाएंगी। पुरानी किताबों के पुन: उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। यूनिफॉर्म: स्कूल कम से कम 5 वर्षों तक यूनिफॉर्म के डिजाइन में बदलाव नहीं कर सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से कपड़े खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। वे खुले बाजार से कहीं से भी खरीद या सिलवा सकते हैं।ट्रांसपोर्ट और री-एडमिशन पर रोक अक्सर देखा जाता है कि स्कूल प्रमोशन के नाम पर हर साल दोबारा नामांकन शुल्क (Re-admission fee) वसूलते हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिया है कि अगली कक्षा में जाने पर छात्रों से दोबारा नामांकन शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही, परिवहन शुल्क (Transport fee) भी सामान्य फीस वृद्धि के नियमों (10% कैप) के दायरे में आएगा। किसी भी छात्र को परीक्षा के समय अतिरिक्त शुल्क के नाम पर प्रताड़ित नहीं किया जाएगा और न ही परीक्षा में बैठने से रोका जाएगा। हर स्कूल में ‘शुल्क समिति’ और ‘PTA’ अनिवार्य पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर स्कूल में अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) और स्कूल शुल्क समिति का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। इसकी जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी। जिन स्कूलों ने अब तक ऐसा नहीं किया है, उन्हें तत्काल गठन का निर्देश दिया गया है। शिकायत के लिए ‘अबुआ साथी’ व्हाट्सएप हेल्पलाइन यदि कोई स्कूल इन नियमों की अवहेलना करता है, तो अभिभावक अब सीधे प्रशासन तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं: व्हाट्सएप नंबर: 9430328080 (अबुआ साथी हेल्पलाइन) लिखित शिकायत: समाहरणालय, ब्लॉक-ए, कमरा संख्या 105 में जमा की जा सकती है। नोडल अधिकारी: रांची सदर की क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी जुही रानी कोफीस वृद्धि अधिकतम 10% वार्षिक, अधिक होने पर DC की अनुमति अनिवार्य।जुर्माना 50,000 से 2.5 लाख रुपए तक।किताबें/यूनिफॉर्म 5 साल का लॉक-इन पीरियड; किसी खास दुकान की बाध्यता नहीं।नामांकन प्रमोशन पर दोबारा एडमिशन फीस लेना पूरी तरह प्रतिबंधित।RTE कोटा 25% सीटों पर गरीब बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना होगा।समाहरणालय स्थित NIC सभागार में हुई इस बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी विनय कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार सहित कई स्कूल प्रतिनिधि और अभिभावक सदस्य मौजूद रहे। प्रशासन के इस कदम को शिक्षा के बाजारीकरण को रोकने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

