नई दिल्ली। नए मेडिकल कॉलेजों और एम्स का दायरा बढ़ाने और आयुष्मान भारत के माध्यम से आम आदमी तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बनाने के बाद मोदी सरकार जिला स्तर पर इलाज का बेहतर ढांचा तैयार करने में जुट गई है। बजट में हर जिले में इमरजेंसी और ट्रामा सेंटर खोलने का प्रविधान इसी कड़ी में है। इसके साथ ही भारत को इलाज के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना की भी घोषणा की गई है। वहीं आप्ट्रोमेट्री, रेडियोलाजी, एनेस्थिसिया, आपरेशन थियेटर टेक्नोलाजी, अप्लाइड साइकोलाजी जैसे क्षेत्र में विशेषज्ञ पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिए अगले पांच साल में एक लाख एप्लाइड हेल्थ सर्विस प्रोफेशनल तैयार किये जाएंगे।

स्वास्थ्य के लिए बजटीय आवंटन पिछले साल से लगभग 10 फीसद बढ़कर एक लाख छह हजार करोड़ हो गया है। राज्यों में स्वास्थ्य की अत्याधुनिक आधारभूत संरचनाओं के निर्माण के लिए पहले चले जा रहे प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन को जारी रखते हुए 4,770 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 570 करोड़ रुपये अधिक है। इस पर पांच सालों में लगभग 66 हजार करोड़ रुपये खर्च किये जाने हैं।भारत पहले से दुनिया के लिए मेडिकल टूरिज्म के रूप में उभर रहा है। बजट में इसे गति देने का प्रविधान किया गया है। इसके लिए निजी क्षेत्र की साझीदारी के साथ पांच क्षेत्रीय चिकित्सा हब बनाया जाएगा। संबंधित राज्यों को चिकित्सा हब बनाने के लिए केंद्रीय सहायता दी जाएगी। इन हब में चिकित्सा से लेकर शैक्षिक और अनुसंधान तक की सुविधाएं होंगी और इलाज के बाद देखभाल और पुनर्वास के लिए आयुष केंद्र और पर्यटन सुविधा केंद्र भी तैयार किये जाएंगे।

पिछले दिनों नई दवाओं के अनुसंधान और ट्रायल के नियमों में बदलाव कर इसे सरल बनाया गया है। अब सीडीएससीओ के निगरानी फ्रेमवर्क को मजबूत कर आम आदमी तक गुणवत्ता पूर्ण दवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। नए दवाओं के रिसर्च और ट्रायल को गति देने के लिए 1000 मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल सेंटर बनाया जाएगा। इसी तरह से कैंसर और दुर्लभ बीमारियों (रेयर डिजीजेज) के सस्ते इलाज का भी रास्ता साफ किया है। बजट में कैंसर से इलाज से जुड़ी 17 दवाओं को आयात शुल्क से मुक्त कर दिया गया है।

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