
रांची। झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम से इडी कार्यालय में मंगलवार को करीब दस घंटे तक पूछताछ हुई। उन्हें इडी ने बुधवार को फिर तलब किया है। मंगलवार को पूछताछ में मंत्री के साथ उनके निलंबित पीएस संजीव लाल, संजीव की पत्नी रीता लाल, नौकर जहांगीर आलम से भी पूछताछ हुई। इडी ने मंत्री से पूछा कि इडी के द्वारा बरामद की गयी राशि किसकी है और उसे किस मद में जमा कर रखा गया था। इधर, सूचना के मुताबिक, इडी बरामद राशि 35.23 करोड़ की राशि किन- किन ठेकेदारों ने दिया है, इसकी जांच भी कर रही है। मंत्री आलमगीर आलम मंगलवार की सुबह 11 बजे इडी कार्यालय पहुंचे थे और वह इडी आॅफिस से 8.30 बजे छोड़ा गया। टेंडर घोटाला मामले में मंत्री को समन जारी पूछताछ करने बुलाया गया था। ईडी के दफ्तर में मंगलवार का दिन बेहद गहमागहमी था।



गौरतलब हो कि मंत्री आलमगीर आलम के पीएस और उनके नौकर के ठिकानों पर पिछले दिनों इडी ने छापामारी कर 35.23 करोड़ रुपये बरामद किये थे। इडी ने कोर्ट को यह जानकारी दी है कि जांच के दौरान यह पता चला है कि गिरफ्तार इंजीनियर वीरेंद्र कुमार राम टेंडर देने के लिए कमीशन एकत्र करते था और उस कमीशन का 1.5% का निर्धारित हिस्सा अपने वरिष्ठों और राजनेताओं के बीच वितरित किया जाता था। इडी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि छह मई को तलाशी कार्रवाई से संबंधित निष्कर्ष और दोनों आरोपियों की मिलीभगत का उल्लेख पहले ही रिमांड याचिका में किया जा चुका है। इसके अलावा पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी भी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद की गयी थी। सात मई को संजीव लाल के एक सहयोगी राजीव कुमार के परिसर से 2.13 करोड़ रुपये की नकदी जब्त हुई थी। कार्रवाई के दौरान आपत्तिजनक सामग्री/ दस्तावेज/ डिजिटल डिवाइस भी मिले थे। जांच में यह पता चला है कि संजीव लाल कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों की ओर से कमीशन के पैसों को जमा करता था।
35 करोड़ रुपये किसके : मंत्री के पीए और उनके दूसरे सहयोगियों के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद बरामद 35 करोड़ रुपये मामले में मंत्री आलमगीर से ईडी पूछताछ कर रही है। इस मामले में मंत्री के पीए संजीव लाल, संजीव के नौकर जहांगीर आलम को ईडी ने 7 मई को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तरी के बाद जहांगीर ने ईडी के सामने खुलासा किया था कि बरामद करोड़ों रुपए पीए संजीव लाल के हैं। वहीं संजीव लाल ने बताया कि पूरे पैसे विभाग में टेंडर देने के बदले मिले कमीशन का है। कमीशन का पैसा अधिकारियों से लेकर राजनेताओं तक जाता था। इसी के बाद मंत्री आलमगीर आलम ईडी की रडार पर आये।

