
साल्टिलो (मेक्सिको)। भारतीय तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने तीरंदाजी की दुनिया में इतिहास रच दिया है। उन्होंने साल्टिलो में आयोजित तीरंदाजी विश्व कप फाइनल के पुरुष रिकर्व वर्ग का खिताब अपने नाम कर लिया। धीरज विश्व कप फाइनल का व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं।
25 वर्षीय सेना के तीरंदाज धीरज ने बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में जापान के जुन्या नाकानिशी को 6-5 से हराया। पांच सेट के बाद दोनों तीरंदाज 5-5 की बराबरी पर थे, जिसके बाद मुकाबले का फैसला शूट-ऑफ से हुआ। निर्णायक शूट-ऑफ में धीरज ने शानदार संयम दिखाते हुए 10 अंक हासिल किए, जबकि नाकानिशी 9 अंक ही बना सके। इसके साथ ही धीरज ने स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
फाइनल में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पांच सेटों के स्कोर 28-28, 28-29, 29-28, 28-30 और 28-27 रहे। मुकाबला इतना करीबी रहा कि आखिरी क्षण तक विजेता का फैसला नहीं हो सका और शूट-ऑफ का सहारा लेना पड़ा।
धीरज के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि इससे पहले वह 2023 और 2024 के विश्व कप फाइनल में पदक हासिल नहीं कर सके थे। अपने तीसरे विश्व कप फाइनल में उतरे धीरज ने इस बार नॉकआउट चरण से ही शानदार प्रदर्शन किया और खिताबी मुकाबले में अपनी क्षमता साबित की।
इस जीत के साथ धीरज ने भारतीय पुरुष तीरंदाजी के विश्व कप फाइनल रिकॉर्ड को भी नया मुकाम दिया। इससे पहले जयंत तालुकदार ने 2010 में एडिनबर्ग में कांस्य पदक जीता था, लेकिन कोई भी भारतीय पुरुष खिलाड़ी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक नहीं जीत सका था।
भारत की ओर से व्यक्तिगत विश्व कप फाइनल का खिताब जीतने वाली एकमात्र अन्य तीरंदाज डोला बनर्जी हैं, जिन्होंने 2007 में दुबई में महिला वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था। इस लिहाज से धीरज का स्वर्ण भारत के लिए 19 साल बाद विश्व कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक की वापसी भी है।
वहीं, भारत की स्टार तीरंदाज दीपिका कुमारी इस प्रतियोगिता में देश की सबसे सफल तीरंदाज बनी हुई हैं। उन्होंने आठ बार विश्व कप फाइनल में हिस्सा लेकर छह पदक जीते हैं, जिनमें पांच रजत और एक कांस्य पदक शामिल है।
धीरज बोम्मादेवरा की साल्टिलो में मिली ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ उनके करियर को नई ऊंचाई दी है, बल्कि भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी के इतिहास में भी एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

