
पटना। राज्य सरकार बलिदानी सैनिकों के आश्रितों को जमीन देगी। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शुक्रवार को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई बंदोबस्ती प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के आश्रितों को उनके गृह जिले में सम्मानपूर्वक जीवनयापन के लिए भूमि उपलब्ध हो।



डिप्टी सीएम ने कहा कि हमने स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवहारिक मानक तय किए हैं, ताकि पात्र परिवारों को बिना अनावश्यक विलंब के तत्काल लाभ मिल सके। विभाग के सचिव जय सिंह ने नया दिशा निर्देश भी जारी कर दिया है। इसके अनुसार, युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों के आश्रितों को गृह जिला के गृह प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए एक एकड़ या आवासीय उपयोग के लिए पांच डिसमिल सरकारी जमीन बंदोबस्त की जाएगी।
यह सुविधा उन सैनिकों के आश्रितों को मिलेगी, जिन्होंने कम-से-कम छह माह तक लगातार सैनिक सेवा की हो और कार्यरत रहते हुए युद्ध में शहीद हुए हों। आश्रितों से सलामी के रूप में सांकेति राश ली जाएगी, लेकिन पांच वर्षों तक वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा।
बल्कि युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अन्य बलों जैसे- बार्डर सिक्योरिटी फोर्स, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, बार्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड्स और असम राइफल्स के जवान यदि युद्ध में वीरगति प्राप्त करते हैं, तो उनके आश्रित भी इसी प्रावधान के तहत भूमि बंदोबस्ती के पात्र होंगे। हालांकि, इसके लिए सेलर्स, सोल्जर्स एवं एयरमेन बोर्ड की अनुशंसा और न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाण-पत्र अनिवार्य होगा।
राज्य का निवासी होना जरूरी : भूमि बंदोबस्ती से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आश्रित बिहार के निवासी हैं। उनके पास आवास के लिए निजी जमीन नहीं है। यदि निजी आवासीय जमीन उपलब्ध पाई जाती है, तो बंदोबस्ती नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी को पहले की तरह इस प्रकार की भूमि बंदोबस्ती का अधिकार रहेगा। यह केवल ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी, विवादमुक्त जमीन पर ही लागू होगा। चयनित भूमि भूदान, भू-हदबंदी, सैरात, कब्रिस्तान, श्मशान, धार्मिक स्थलों, अतिक्रमण और न्यायालयीन विवाद से पूरी तरह मुक्त हो।

