
रांची। इस बार पाला बदलकर दूसरे दलों से चुनाव लड़नेवाले कई नेताओं को हार का सामना करना पड़ा। इनमें गीता कोड़ा, जेपी पटेल, सीता सोरेन, ममता भुइयां सम्मिलित हैं।
इनमें सीता सोरेन ही नलिन सोरेन को टक्कर दे पाईं। हालांकि अंत में उनकी भी हार हो गई। वहीं, अपने-अपने दलों से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़नेवालों को भी मुंह की खानी पड़ी है। जनता ने उन सभी को नकार दिया।
पाला बदलकर चुनाव लड़नेवाले नेताओं की बात करें तो इसमें सबसे बड़ा नाम सीता सोरेन का है। जामा से विधायक रहीं सीता सोरेन झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की बड़ी बहू हैं।
इन्होंने चुनाव से पहले भाजपा में सम्मिलित होकर दुमका से चुनाव लड़ा था। इसी तरह, भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतने वाले जेपी पटेल ने कांग्रेस में सम्मिलित होकर हजारीबाग से चुनाव लड़ा था।
वहीं, सिंहभूम से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली गीता कोड़ा इस बार चुनाव से पहले भाजपा में सम्मिलित हो गई थीं। यहां भी उनकी करारी हार हुई।
राजद की एकमात्र प्रत्याशी ममता भुइयां ने भी चुनाव से पहले पार्टी में सम्मिलित होकर टिकट लिया था। इनकी भी जबर्दस्त हार हुई। पलामू में ही कामेश्वर बैठा ने राजद छोड़कर बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। ये यहां तीसरे स्थान पर रहे।
बागी होकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं की बात करें तो लोहरदगा में चमरा लिंडा तथा कोडरमा में जयप्रकाश वर्मा कुछ खास नहीं कर सके। झामुमो के विधायक चमरा लिंडा ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ा था। इसी तरह, जय प्रकाश वर्मा ने भी बागी चुनाव लड़ा था।
हेमंत सोरेन के विरुद्ध लगातार हमलावर रहे लोबिन हेंब्रम भी कुछ खास नहीं कर सके। ये वोटकटवा ही साबित हुए। इन्होंने राजमहल से निर्दलीय चुनाव लड़ा। खूंटी से चुनाव लड़नेवाले झामुमो के बसंत कुमार लोंगा से अधिक वोट नोटा को मिले। जयप्रकाश वर्मा की भी यही स्थिति हुई।
