
दुमका । गोपीकांदर इन दिनों साइबर अपराधियों की नजर में है। पिछले 10 दिनों के अंदर एक दर्जन से ज्यादा लोगों को साइबर अपराधियों ने अपना शिकार बनाया, जबकि दर्जनों ऐसे लोग भी है जिनका व्हाटएप्स हैक कर लोगों से पैसे की डिमांड किया गया। साइबर अपराधियों के बिछाए इस जाल में रविवार को कई लोग फंस गए और व्हाट्सएप पर मैसेज देखकर पैसे भी भेज दिया। जब लोगों को आभास हुआ कि उनसे पैसे उनका परिचित नहीं बल्कि साइबर अपराधी मांग रहे। लोग कुछ समझ पाते तब तक कई लोग पैसे भेज चुका थे। मामला तेजी से ग्रामीणों में फैली और फिर लोकल व्हाट्सएप गुरु में साइबर ठगी की जानकारी साझा की गई तबकर लोग सतर्क हुए। बीते दिन कुश्चिरा पंचायत के धोबरना गांव निवासी सैमुअल मुर्मू के व्हाट्सएप पर मंइयां सम्मान योजना की एक एपीके फाइल को डाउनलोड कर खोला उनका व्हाट्सएप हैक हो गया। उनका व्हाटएप्स पर जितने भी कॉन्टेक थे सभी के मोबाइल पर दो हजार रुपए की मांग किया गया साथ जितने भी ग्रुप थे सभी। ग्रुप में मंइयां सम्मान योजना और पीएम किसान योजना का एपीके फाइल सेंड कर दिया गया ताकि लोगों द्वारा क्लिक करते ही साइबर के शिकार हो जाएंगे। रविवार को भी सिदपहाडी गांव के शिवनाथ गृही और गखरौनी बाजार के मधुसूदन दास सहित आधे दर्जन लोग साइबर के शिकार हो गए। सभी का
व्हाट्सएप हैक कर लिया गया। बताया जाता है कि इन सभी के व्हाट्सएप पर मंइयां सम्मान योजना और पीएम किसान योजना का एपीके फाइल आया था जिसके बाद क्लिक करते ही हैक कर लिया गया। उनके व्हाट्सएप पर मौजूद कॉन्टेक लोगों से पैसे की डिमांड किया गया। कई लोगों ने मैसेज देखकर पैसे भी डाल दिया।
साइबर ठगी से संबंधित सूचना के बाद थाना प्रभारी सुमित कुमार भगत ने बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो सबसे पहले टोल फ्री नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करें। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधियों ने अब एपीके फाइल का उपयोग कर ठगी कर रहे है। इस फाइल को क्लिक करते हुए हैक हो जाता है। एपीके फाइल से बचें और कभी भी इसी डाउनलोड या क्लिक नहीं करें। किसी भी व्यक्ति के व्हाट्सएप पर कोई एपीके फाइल आता है तो उसे नहीं खोलना है, किसी भी अज्ञात स्कैम चिन्हित फोन नंबर को रिसीव नहीं करना है।
उन्होंने कहा कि बैंक मैनेजर के नाम से आए हुए कॉल में किसी प्रकार की कोई व्यक्ति अपनी खाता संख्या से संबंधित जानकारी नहीं देना है। अंजान कॉलर से फोन पर आई हुई ओटीपी शेयर नहीं करना है। अंजान कॉल से किसी पुलिस अधिकारी का परिचय देते हुए पैसे की मांग को लेकर विचलित नहीं होनी है और इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को तुरंत देने की कोशिश करें।
