नई दिल्ली। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के स्वीकार किये जाने के बाद नए उपराष्ट्रपति को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। भाजपा नेताओं के बीच चर्चा में कई नाम सामने आ रहे हैं। लेकिन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान इसके लिए पहली पसंद के रूप में सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ब्रिटेन और मालदीव के दौरे लौटने के बाद नए उपराष्ट्रपति के चयन लेकर फैसला हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में नए उपराष्ट्रपति के लिए जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का नाम भी है।

पिछली बार जब जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बने थे, उस समय भी राजनाथ सिंह का नाम चर्चा में था। लेकिन दो-दो बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके और पिछले 11 सालों से मोदी सरकार में पहले गृह और अब रक्षा मंत्री का काम संभाल रहे राजनाथ सिंह ने उस समय ही इसके लिए अनिच्छा जता दी थी। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नाम पर कुछ हलकों में चर्चा हो रही है।

इसके लिए उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने का हवाला दिया जा रहा है। लेकिन कुछ वरिष्ठ नेता राज्यसभा में नेता सदन के साथ ही स्वास्थ्य और रसायन व उर्वरक जैसे दो-दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे जेपी नड्डा को सरकार से मुक्त कर उपराष्ट्रपति बनाये जाने की संभावना से साफ इनकार कर रहे हैं।

नीतीश कुमार की संभावनाएं कम : इसके अलावा बिहार से नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति बनाने की मांग भी सामने आ रही है, लेकिन इसकी संभावना नगण्य मानी जा रही है। वहीं आरिफ मोहम्मद खान के लंबे राजनीतिक अनुभव और भाजपा व संघ परिवार के साथ वैचारिक समानता को उपराष्ट्रपति पद के लिए सबसे अनुकूल माना जा रहा है।

लंबे समय से सक्रिय राजनीतिक जीवन से अलग रहने के बाद मोदी सरकार ने उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया था और फिर बिहार का राज्यपाल बनाया। शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संसद से कानून बनाने के खिलाफ राजीव गांधी मंत्रीमंडल से इस्तीफे के साथ मुस्लिम कट्टरपंथ और तुष्टीकरण के खिलाफ वे अपने रूख पर लगातार कायम रहे। तीन तलाक से लेकर वक्फ कानून में संशोधन तक में आरिफ मोहम्मद खान ने मोदी सरकार के फैसले का तर्कों के साथ बचाव किया।

पटना के राजनीतिक गलियारों में जोर शोर से चर्चा है कि बीजेपी के थिंकटैंक आरिफ मोहम्मद खान को उपराष्ट्रपति बनाने का फैसला कर सकती है। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एक ऐसा चेहरा हैं जो विवादों से कोसो दूर हैं। बेहद विद्वान आरिफ मोहम्मद खान इस्लामिक कट्टरता से दूर भारतीय समाज संस्कृति को पेश करने वाले शख्स हैं। वह भारत में प्रोग्रेसिव सोच रखने वाले मुसलमानों का चेहरा हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के 11 साल के कार्यकाल को देखें तो उन्होंने खासकर इस्लाम से जुड़े उन्हीं फैसलों को छूआ है जो उसे प्रोग्रेसिस बनाती है। उदाहरण के तौर पर तीन तलाक हो, चाहे वक्फ संशोधन कानून इन तमाम मुद्दों पर आरिफ मोहम्मद खान ने खुलकर मोदी सरकार का साथ दिया है। साथ ही इन फैसलों को मुस्लिम समाज के लिए हितकारी बताते रहे हैं।

आरिफ मोहम्मद को सपोर्ट करने को मजबूर होगा विपक्ष : आरिफ मोहम्मद का चेहरा अगर उपराष्ट्रपति पद के लिए आगे किया जाता है तो उसपर तथाकथित सेक्युलर पार्टियों को भी मुहर लगाने की विवशता होगी। खासकर बिहार जैसे राज्य जहां इसी साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। यहां लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाइटेट चुनाव में अपनी सेक्युलर छवि बरकार रखने के लिए आरिफ मोहम्मद खान के नाम पर शायद ही खिलाफत करे। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि लालू और नीतीश दोनों से आरिफ मोहम्मद खान के व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद अच्छे रिश्ते रहे हैं। आरिफ मोहम्मद खान के चेहरे पर विरोध करने का जोखिम पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस पार्टी भी शायद ही ले। यहां याद दिला दें कि आदिवासी समाज से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे बढ़ाकर विपक्ष का अधिकतम सपोर्ट पा चुकी है। उसी तरह मुस्लिम समाज से आने वाले आरिफ मोहम्मद खान के मामले में दिख सकता है।

रामनाथ कोविंद वाला दांव : यहां यह भी याद करने वाली बात है कि साल 2017 में रामनाथ कोविंद को बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के लिए आगे बढ़ाया था। तब कोविंद बिहार के राज्यपाल थे। उस वक्त नीतीश कुमार कांग्रेस और आरजेडी के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे फिर भी बिहार एंगल पर रामनाथ कोविंद का सपोर्ट किया था। नीतीश कुमार ने कहा था कि बिहार के राज्यपाल को राष्ट्रपति बनाया जा रहा है यह बिहारी गौरव की बात है। आरिफ मोहम्मद खान के नाम के साथ भी यही दांव दोहराया जा सकता है।

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