सीवान। बिहार के सीवान जिले के आलमापुर गांव में पटाखा निर्माण के दौरान हुए भीषण विस्फोट ने अवैध पटाखा कारोबार और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में प्रशासन ने अब तक पांच शव बरामद किए हैं, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि छह लोगों की मौत हुई है। विस्फोट में एक बच्ची घायल हुई है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पटाखे बनाने वाला मकान पूरी तरह ढह गया।

35-40 वर्षों से चल रहा था पटाखा निर्माण

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, अमीरुद्दीन मियां के घर में पिछले 35 से 40 वर्षों से पटाखे बनाने का काम किया जा रहा था। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 26 वर्ष पहले भी इसी मकान में पटाखा निर्माण के दौरान विस्फोट हुआ था। उस घटना में अमीरुद्दीन मियां के बेटे अमुरात और बिहारी महतो की मौत हो गई थी, जबकि अमीरुद्दीन मियां घायल हुए थे। इसके बावजूद यहां पटाखा बनाने का काम कथित तौर पर जारी रहा।

मुखिया संघ के प्रतिनिधि जीव नारायण यादव के मुताबिक, गांव के चार से पांच घरों में पटाखे बनाने का काम होता था। शादी-विवाह, छठ पूजा और मुहर्रम जैसे अवसरों पर पटाखों की मांग के कारण इस कारोबार से अच्छी आमदनी होती थी। उन्होंने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले प्रशासन ने छापेमारी कर कार्रवाई की थी और कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।

मलबे से लेकर धान के खेत तक तलाशी अभियान

हादसे के बाद प्रशासन ने घटनास्थल को सील कर सर्च अभियान शुरू कर दिया है। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, ताकि किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की आशंका दूर की जा सके। तलाशी के दौरान ध्वस्त मकान के पीछे स्थित धान के खेत से बारूद भी बरामद हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई के डर से कुछ लोगों ने विस्फोटक सामग्री खेतों में फेंक दी होगी। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

कई विभागों की टीमें जुटीं, दो पुलिसकर्मी निलंबित

घटना की गंभीरता को देखते हुए सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा ने जांच के निर्देश दिए हैं। घटनास्थल पर बम निरोधक दस्ता, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), डॉग स्क्वायड, अग्निशमन विभाग और बिजली विभाग की टीमें साक्ष्य जुटा रही हैं। आसपास के मकानों की भी तलाशी ली जा रही है।

वहीं, सीवान के पुलिस अधीक्षक भरत सोनी ने कार्रवाई करते हुए जामो थानाध्यक्ष धीरज कुमार और चौकीदार चंद्रिका मांझी को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए महराजगंज के एसडीपीओ अमन के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है।

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्रामीणों के दावे के मुताबिक, गांव में दशकों से पटाखे बनाने का काम चल रहा था और पहले भी विस्फोट हो चुका था, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या संबंधित मकान में पटाखा निर्माण का वैध लाइसेंस था? वहां कितनी विस्फोटक सामग्री रखी गई थी और सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं?

फिलहाल, प्रशासन की जांच और तलाशी अभियान जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों, पटाखा निर्माण की वैधता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

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