
पटना। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। बिहार बीजेपी की कोर कमिटी की दो दिन चली बैठकों में प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की गई। इन बैठकों में फाइनल किए गए नामों को अब बिहार बीजेपी की ओर से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास दिल्ली भेजे जाएंगे। इसके बाद बीजेपी का पार्लियामेंट्री बोर्ड अंतिम निर्णय लेगा। हालांकि बीजेपी ने टिकट देने के लिए ‘KJ’ यानी कामकाज और जनसमर्थन वाला फॉर्मूला तैयार किया है। मतलब जिसका कामकाज बढ़िया होगा, जनता उसके कामकाज से खुश होगी, उस विधायक का टिकट बचा रहेगा।



बीजेपी ने इस बार टिकट चयन में पूरी पारदर्शिता अपनाने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने अपने विधायकों के कामकाज और जनसमर्थन को लेकर एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई है। बीजेपी की कुछ सीटों पर विधायकों का कामकाज ठीक नहीं है, जनता भी उनसे नाखुश है। ऐसी सीटों पर बीजेपी उस नेता को तवज्जो देगी, जिसके साथ जनसमर्थन होगा।
प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने रविवार को बताया था कि बीजेपी की सभी सिटिंग सीटों (वर्तमान विधायकों वाली सीटों) पर गहन समीक्षा की गई है। बैठक में मौजूद प्रदेश चुनाव समिति के सभी सदस्यों ने अपने-अपने सुझाव दिए और एक-एक सीट पर विस्तृत चर्चा की गई। जायसवाल ने कहा, ‘प्रदेश चुनाव समिति के सदस्यों का एक ही मत था कि किसी भी परिस्थिति में हमारा उम्मीदवार इतना मजबूत हो कि हम एक-एक सीट भारी मत से जीतने का काम करें।’
गठबंधन के बाद बची सीटों पर होगी अगली चर्चा
दिलीप जायसवाल ने बताया कि सिटिंग सीटों पर चर्चा पूरी हो चुकी है। अब उम्मीद है कि इसी बीच गठबंधन दल के साथ सीट शेयरिंग का मामला भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद, ‘सिटिंग सीट के बचे हुए सीटों को छोड़कर जो सीटें हमारे भारतीय जनता पार्टी के कोटे में आएंगी, हम उन पर फिर से एक चर्चा करने का काम करेंगे।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि दक्षिणी बिहार, खासकर शाहाबाद और मगध क्षेत्र की सिटिंग सीटों पर बहुत बारीकी से चर्चा हुई है, और इन क्षेत्रों में एनडीए इस बार सोच-विचार कर उम्मीदवार देगा और फैसला लेगा। बीजेपी ने यहां की सीटों के लिए रणनीति तैयार की है।
टिकट काटने का अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व का: टिकट काटने या मौजूदा विधायकों को रिपीट करने के सवाल पर प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह फैसला राज्य समिति के दायरे में नहीं आता है। उन्होंने कहा, ‘टिकट काटना या नहीं काटना यह केंद्रीय नेतृत्व जब सेंट्रल पार्लियामेंट्री बोर्ड बैठता है, तो वहां पर इस बात का चर्चा और फैसला होता है।’ उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश की चुनाव समिति का काम केवल अपना विचार और रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व के सामने पेश करना है कि वर्तमान विधायक पर उनका क्या मंतव्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नया उम्मीदवार आवेदन देता है तो उस पर भी विचार किया जाता है।

