
पटना। पटना में अब जमीन के नीचे इतिहास और संस्कृति का एक अनोखा रास्ता तैयार हो रहा है। बिहार संग्रहालय और पटना संग्रहालय को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सुरंग की खुदाई रविवार से शुरू हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार संग्रहालय परिसर में सुरंग खोदने वाली मशीन का बटन दबाकर निर्माण कार्य की शुरूआत की। इसके बाद उन्होंने सुरंग के भीतर लगभग 500 मीटर पैदल चलकर तैयारियों का निरीक्षण भी किया। करीब 542 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सुरंग देश में दो संग्रहालयों को जोड़ने वाली अपनी तरह की पहली परियोजना होगी।



जमीन के नीचे बनेगा संस्कृति का रास्ता : लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे बनाई जा रही है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को दी गई है, जिसने सुरंग की खुदाई के लिए मशीन सिंगापुर से मंगाई है। सुरंग के निर्माण के बाद पर्यटकों को एक संग्रहालय से दूसरे संग्रहालय तक जाने में काफी सुविधा होगी। सुरंग पूरी तरह वातानुकूलित होगी और इसके दोनों छोर पर लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी। साथ ही पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ियां और सुरक्षित पैदल मार्ग भी बनाया जाएगा। बच्चों और बुजुर्गों की सुविधा के लिए यहां बैटरी से चलने वाली गाड़ियां चलाई जाएंगी। इस सुरंग की खास पहचान इसकी कलात्मक सजावट होगी। दीवारों पर मिथिला पेटिंग के माध्यम से बिहार की लोक संस्कृति, विरासत, भित्तिचित्र और अन्य कलाकृतियां उकेरी जाएंगी। इस तरह यह सुरंग एक भूमिगत कला दीर्घा का रूप ले लेगी, जहां चलते-चलते पर्यटक बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को देख सकेंगे।

