
नई दिल्ली। आतिशी, आतिशी सिंह, आतिशी मार्लेना सिंह…। आतिशी मार्लेना के दिल्ली के मुख्यमंत्री बनते ही लोग उनकी जाति और जीवनी खंगालने लगे। वैसे तो वह आतिशी के नाम से ही चर्चित हैं मगर राजनीति में आने के बाद उनके नाम के साथ लगे सरनेम मार्लेना को लेकर काफी चर्चा हुई। सवाल यह है कि मां डॉ. तृप्ता वाही और पंजाबी राजपूत पिता विजय सिंह की बेटी मार्लेना कैसे हो गई? उनके पति का नाम प्रवीण सिंह है, जो पंजाबी क्षत्रिय समाज से ताल्लुक रखते हैं। 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव के ऐफिडेविट में भी उनका नाम आतिशी मालेर्ना ही है। इंटरनेट की दुनिया में कई प्लेटफॉर्म पर उनका नाम आतिशी मार्लेना सिंह भी लिखा है। हालांकि आतिशी कई बार बयान दे चुकी हैं कि वह जाति और धर्म की राजनीति में भरोसा नहीं रखती हैं।



10 साल में सलाहकार से सीएम तक का सफर
दिल्ली की 8वीं मुख्यमंत्री के तौर शपथ लेने वाली आतिशी मार्लेना ऐसी राजनेता हैं, जो पहली जीत के बाद ही कैबिनेट मंत्री और फिर मुख्यमंत्री बनी हैं। अपने 10 साल के राजनीतिक कैरियर में उन्होंने मेनिफेस्टो कमेटी के सदस्य से सीएम तक का सफर तय किया। एक साल बाद ही 2014 के चुनाव में वह आप की प्रवक्ता बनाई गई। 2015 में आतिशी शिक्षा मंत्री मनीष सिसौदिया की सलाहकार बनाई गईं। दिल्ली के जिस एजुकेशन सिस्टम को आम आदमी पार्टी ने हमेशा अपना मजबूत पक्ष बताया, उसका क्रेडिट भी आतिशी को जाता है।
आतिशी मार्लेना की जाति का मुद्दा का सबसे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले, जब कांग्रेस और बीजेपी ने उन पर वोटरों को बरगलाने के लिए मार्लेना सरनेम हटाने का आरोप लगाया। तब आम आदमी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अक्षय मराठे ने सफाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा की आतिशी जैसी प्रगतिशील राजनेता वोट मांगने के लिए अपने जाति के नाम का उपयोग नहीं करती हैं। उन्हें मार्लेना हटाने और केवल आतिशी का उपयोग करने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। इसके बाद तत्कालीन डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया ने ट्वीट किया कि बीजेपी और कांग्रेस के लोगों! ध्यान रखना कि उनका पूरा नाम आतिशी सिंह है। वह एक राजपूतानी हैं। एक कट्टर क्षत्राणी… झांसी की रानी। सावधान! वह जीतेगी और इतिहास भी रचेगी। 2019 में पूर्वी दिल्ली के बीजेपी उम्मीदवार गौतम गंभीर के मुकाबले में उतरी आतिशी ने अपने ऐफिडेविट में मालेर्ना सरनेम का इस्तेमाल किया। 2020 के विधानसभा चुनाव में वह पूरे नाम के साथ उतरीं, मगर उनका सरनेम सिंह गायब था।
मार्क्स और लेनिन के नाम से बनीं मार्लेना
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, दिल्ली की नई सीएम आतिशी के माता-पिता दोनों प्रोफेसर रहे हैं। उनके पिता विजय सिंह कट्टर कम्युनिस्ट थे। उन्होंने जाति और धर्म की पहचान का विरोध करते हुए आतिशी के नाम के साथ मार्लेना जोड़ दिया। यह उनका सेकेंड नेम था, सरनेम नहीं। मार्लेना में कार्ल मार्क्स और व्लादिमीर लेनिन के उपनाम मिले हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में आतिशी पर पंजाबी पहचान के आधार पर वोट मांगने के आरोप लगे। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि कालकाजी में 30 फीसदी वोटर पंजाबी हैं, इसलिए आतिशी धर्म के आधार पर वोट मांग रही हैं। इन आरोपों का आतिशी ने खंडन किया। उन्होंने कहा कि मैंने कभी वोट नहीं मांगा कि मैं पंजाबी हूं। मैं आम आदमी पार्टी के कामों के आधार पर समर्थन मांग रही हैं।

