
रांची। झारखंड की जनता अपराधियों से परेशान है। रांची की सभी छोटी-बड़ी दुकानें रात आठ बजे ही इस डर से बंद हो जाती हैं कि कोई उन्हें लूट न ले। आए दिन राजधानी और अन्य जिला में हत्या, अपहरण, जबरन वसूली, पेट्रोल पंप डकैती और मॉल में डकैती करके अपराधी आराम से निकल जाते हैं। यह बातें बडकागांव की पूर्व विधायक और कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने गुरुवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रही थीं।



उन्होंने कहा कि राज्य में संगठित अपराध डकैती, ट्रैफिकिंग, लूट, ब्राउन शुगर या ड्रग्स माफिया और जबरन वसूली को अपराधी जेल से संचालित कर रहे हैं। यदि पुलिस चाहे तो इन घटनाओं पर रोक लगा सकती है, लेकिन सच यह है कि अधिकतर अपराध पुलिस के संरक्षण में ही चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड का अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनाकर अजरबैजान, फ्रांस और इंग्लैंड चला जा रहा है और पुलिस पूरी उसे पकडने में विफल साबित हो रही है। ड्रग्स का धंधा भी धड़ल्ले से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि क्राइम डेटा से पता चलता है कि सबसे ज्यादा हत्याएं पहले गुमला में होती थीं, जो अब रांची में होने लगी हैं।
अंबा ने कहा कि राज्य में डीजीपी का पद भी भाड़े में चल रहा है। इस पद पर रिटायरमेंट के बाद भी बहाली हो रही है उन्होंंने डीजीपी तदाशा मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल खडा करते हुए कहा कि राज्य की पुलिस एक गिरोह को ऊपर उठाने के लिए दूसरे गिरोह को मार रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस के 100 नंबर पर कोई फोन रिसिव नहीं करता है।
अंबा प्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद डीजीपी की नियुक्ति से लोगों का पुलिस पर से विश्वास उठ गया है। तंज कसते हुए कहा कि डीजीपी का नाम तदाशा नहीं, हताशा मिश्रा होना चाहिए।
सरकार के पास रिमोट, बैट्री अमित शाह के पास : कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले हत्या के मामले में गुमला एक नंबर पर होता था, लेकिन अब राजधानी रांची अपराध की राजधानी बन चुकी है। पुलिस का रिमोट तो सरकार के पास है, लेकिन इसकी बैट्री अमित शाह के पास है। राज्य में भाजपा के लोगों की अधिक बातें सुनी जा रही हैं।

