
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट पर सरकार द्वारा बुलाई गई संसद में प्रमुख दलों के नेताओं की बैठक में सरकार से इससे जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक जानकारी दी है। बैठक के बाद सरकार ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने भी विश्वास दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वो सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करेंगे। हालांकि विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा न कराए जाने पर असंतोष जताया और भविष्य को लेकर आशंकाएं जताई। संसद भवन में लगभग पौने दो घंटे चली सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि बैठक में विपक्ष को पश्चिम एशिया संकट के विषय पर पर्याप्त जानकारी दी गई और विपक्षी नेताओं ने भी विश्वास दिलाया कि संकट की इस घड़ी में वो सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों का समर्थन करेंगे।उन्होंने कहा कि आज की बैठक में विस्तृत जानकारी दिए जाने के बाद फिलहाल विपक्ष को और जानकारी मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की इच्छा से बैठक बुलाई गई। सभी नेताओं को धन्यवाद करना चाहता हूं कि वो बैठक में शामिल हुए। विभिन्न दलों ने अपनी ओर से चिंताएं व्यक्ति की। युद्ध के कारण जो परिस्थिति उत्पन्न हुई उसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा और सरकार ने क्या कदम उठाए, उसके बारे में कई विपक्षी दलों के नेताओं ने सवाल उठाए जिनका सरकार ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अंत में सभी विपक्षी दलों ने कहा कि संकट की घड़ी में सरकार जो फैसला करेगी और जो कदम उठाएगी, सब एकजुट होकर साथ देंगे। रिजिजू का कहना था कि सरकार के साथ एकजुटता प्रकट करने में विपक्ष ने परिपक्वता का परिचय दिया। ईंधन सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों को लेकर विपक्ष ने संतुष्टि जताई।यह पूछे जाने पर कि विपक्ष इस मामले पर संसद के दोनों सदनों में चर्चा की मांग कर रहा है तो रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से पर्याप्त जानकारी दी गई। इस विषय पर और जानकारी की मांग की जरूरत नहीं पड़ेगी, भविष्य के बारे में वह नहीं कह सकते। उनका कहना था कि सरकार ने विपक्ष के सुझावों को सुना है और उनकी शंकाओं को भी दूर करने का प्रयास किया है।दूसरी तरफ विपक्ष ने कहा कि इस मामले से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। बैठक में विपक्ष ने लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा की मांग की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा कि सरकार की ओर से स्पष्टीकरण देने की कोशिश हुई जो संतोषजनक नहीं है। हम लोगों की मांग है कि लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होनी चाहिए, उसके बाद लोगों को संतुष्टि होगी। उन्होंने कहा कि बहुत सारे मुद्दे थे, जिन पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान जो हमसे हर तरह से कमजोर है, वो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और हम मूकदर्शक बने हुए हैं।समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत चर्चा जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से किए गए बहुत सारे सवालों का जवाब संतोषजनक नहीं था। आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि सरकार का पक्ष है कि तेल और गैस की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि दो-चार दिन में सरकार के दावे की सच्चाई पता चल जाएगी।सूत्रों के अनुसार बैठक में पेट्रोलियम मंत्री और विदेश मंत्री ने विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। सरकार ने बताया गया तेल व गैस की कोई कमी नहीं है। आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। बैठक में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोज की स्थिति पर भी चर्चा हुई, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है। सरकार ने बताया कि अभी तक हमारे चार जहाज वहां से निकल चुके हैं और कुछ और जल्दी निकलेंगे। ये हमारे लिए बड़ी बात है। कई देशों के शिप अभी फंसे हुए हैं।विपक्ष से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जब ईरान के साथ पाकिस्तान की मध्यस्थता का मुद्दा उठा तो सरकार की ओर से बताया गया कि यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है, बल्कि यह तो 1981 से चल रहा है। एक तरह से अमेरिका ने सालों से पाकिस्तान को ईरान के साथ बातचीत में लगा रखा है।सूत्रों के अनुसार विपक्ष ने बैठक में प्रधानमंत्री की ओर से संसद में दिए गए कोविड से जुड़े बयान पर भी चिंता जताई। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के बयान से देश में चिंता के हालात बन सकते हैं। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि ऐसा नहीं है, लेकिन अगर कहीं ऐसा है तो हम उसको देख रहे हैं।सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बातचीत हुई है। इस बातचीत में भारत की स्पष्ट नीति दोहराई गई और प्रधानमंत्री ने कहा कि हमको युद्ध नहीं चाहिए। यह संदेश वैश्विक मंच पर भारत की शांति और संतुलन की नीति को स्पष्ट करता है। बैठक के दौरान विदेश सचिव ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति और भारत के हितों पर प्रेजेंटेशन भी दिया। इससे विपक्ष को रणनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं की जानकारी दी गई, ताकि राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक सहमति बन सके।




