
रामगढ़ । शहर के विद्यानगर में महिला सुशीला देवी (60) की अपराधियों ने दिनदहाड़े हत्या की। अपराधियों ने यह दिन बेहद बारीकी से छानबीन कर चुना था। उन्हें इस बात की पूरी खबर थी कि सुशीला देवी के घर में कोई भी मौजूद नहीं है। घर में रहने वाले सदस्यों और उनके आने-जाने का समय भी अपराधियों के पास शायद पहले से ही था।




सुशीला देवी अपने खूबसूरत आशियाने में अपने पति अशर्फी प्रसाद, बेटी अल्का और नाती-नतनी के साथ रह रही थी। नतनी को छोड़ने के लिए अशर्फी प्रसाद बुधवार को ही कोलकाता निकले थे। अपराधियों को उनके जाने की पक्की खबर थी। साथ ही उन्हें इसकी सूचना भी थी कि बेटी अल्का मेदांता अस्पताल रांची में काम करती हैं। इसीलिए उन लोगों ने गुरुवार का दिन चुना। समय भी सुबह 9:00 बजे का चुना गया, जब आसपास के लोग भी अपने घरों में काम में व्यस्त रहते हैं।
सुशीला देवी के पति अशर्फी प्रसाद अपनी नतनी को छोड़ने के लिए बुधवार को ही कोलकाता के लिए निकले थे। रामगढ़ में सुशीला देवी के पास उनकी बेटी अल्का कुमारी साथ रह रही थी। गुरुवार की सुबह 7:00 बजे वह मेदांता अस्पताल ओरमांझी के लिए निकल गई थी। वह वहीं पर काम करती है। अलका ने बताया कि सुबह 10:00 बजे उसे फोन पर मोहल्ले वालों ने घर में आग लगने की सूचना दी। जब वह घर पहुंची तो देखा कि उसकी मां की लाश घर के रसोई घर में ही पड़ी हुई है।
मलेशिया में रहता है बेटा : अशर्फी प्रसाद और सुशीला देवी का बेटा फिलहाल भारत में मौजूद नहीं है। पेशे से इंजीनियर उनका बेटा वर्तमान समय में अपने परिवार के साथ मलेशिया में रहता है। उसे भी इस घटना की जानकारी दे दी गई है।
अशर्फी प्रसाद ने अपने परिवार और घर की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा भी इंस्टॉल कराया था। मुख्य द्वार से लेकर ग्राउंड फ्लोर और घर के हॉल में भी कैमरे लगे हुए थे। यूं कहें कि उनका पूरा घर सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में था। इस बात की खबर भी अपराधियों को बखूबी थी। तीन लड़के और एक लड़की बेहद सालीकेदार कपड़े पहने उनके घर में घुसते हैं। ऐसा दशार्ते हैं कि आसपास वालों को यह लगे कि वे सुशीला देवी के रिश्तेदार हैं। 1 घंटे के भीतर उन चारों लोगों ने हत्याकांड को अंजाम दिया और फिर घर में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर अपने साथ लेकर चलते बने। ताकि पुलिस को अपराधियों की पहचान करने में मुश्किल हो।
हत्या करने के बाद अपराधियों ने सबूत मिटाने के लिए पूरा प्रयास किया है। चारों अपराधी घर में घुसे और बेखौफ होकर सुशीला देवी की हत्या की। साक्ष्य मिटाने के लिए उन लोगों ने पूरे घर को तीतर-बितर कर दिया। घटनास्थल पर ऐसा सीन बनाया गया कि लोगों को यह लगे कि उस घर में लूटपाट हुई है। आलमीरा, पलंग और सभी लॉकर को खोलकर सामान को बिखेरा गया था। इसके बाद भी उन लोगों ने अपने सबूत मिटाने के लिए एक दूसरा हथकंडा भी अपनाया। घर के मास्टर बेडरूम में अपराधियों ने आग लगा दी। यह दृश्य यह बताने के लिए था कि लोगों को वहां शॉर्ट सर्किट होने का आभास हो।

