
पटना। बिहार में तिलकोत्सव या बारात आगमन के बाद द्वारपूजा के समय एक गीत गाया जाता है- हथिया हथिया शोर कइले, गदहो ना ले अइए रे। यानी कहा था हाथी-घोड़ा लाएंगे लेकिन गदहा लेकर भी नहीं आये। वैसे तो यह गीत भोजपुरी विवाह गीत का मुखड़ा है लेकिन इसका प्रयोग हिंदी मुहावरे की तरह भी किया जाता है। लंबी-लंबी फेंकने वालों के लिए यही कहा जाता है।



बिहार MLC चुनाव में कांग्रेस ने बहुत जोरशोर से पांच प्रत्याशी उतारे थे। तब उसने कहा था कि राजद के खड़ा होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता, हम चुनाव में मजबूती के साथ उतरेंगे और अच्छा प्रदर्शन करेंगे। लेकिन नतीजा बहुत शर्मनाक रहा। पढ़े-लिखे और प्रबुद्ध वोटरों ने भी कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया। राहुल गांधी का दावा है कि देश का युवा वर्ग उन्हें समर्थन दे रहा है तो फिर जेन जी के स्नातक वोटरों ने उन्हें क्यों खारिज कर दिया?
आलाकमान की मंजूरी से तय हुए थे 5 प्रत्याशी : बिहार MLC चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की सहमति के बाद कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल के हस्ताक्षर से इन पांच प्रत्याशियों की सूची जारी हुई थी। मतलब इस फैसले में शीर्ष नेतृत्व और बिहार नेतृत्व दोनों शामिल थे। दरभंगा शिक्षक सीट से डॉ. मदन मोहन झा, कोसी स्नातक सीट मनोज कुमार जायसवाल, दरभंगा स्नातक से रजनीकांत पाठक, पटना शिक्षक सीट से डॉ. संजय यादव और पटना स्नातक सीट से डॉ. असदुल्ला खान को MLC चुनाव में उम्मीदवार बनाया गया था। इनमें केवल मदन मोहन झा सीटिंग MLC थे। कांग्रेस की इसचुनाव में क्या स्थिति है इसका आंकलन किये बिना उसने सिर्फ इसलिए 5 उम्मीदवार उतार दिये क्यों कि राजद को जवाब देना था।
राजद ने हरा दिया कांग्रेस के सीटिंग MLC को : राहुल गांधी चाहे राजद की जितनी तरफदारी करें लेकिन हकीकत बहुत कड़वी है। राजद ने चुनाव लड़कर दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के सीटिंग MLC मदन मोहन झा को हरा दिया। मदन मोहन झा करीबी मुकाबले में सिर्फ 324 मतों से हारे। इस सीट राजद के कुंवर राउत को सिर्फ 128 वोट मिले लेकिन उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया जिससे मदन मोहन झा अपनी सीट गंवा बैठे। अब भी अगर राहुल गांधी राजद के पीछे-पीछे चलना पसंद करते हैं तो ये उनकी मर्जी है। जैसे चाहें वैसे पार्टी चलाएं। जब हार से भी कोई फर्क नहीं पड़ना है तो कोई क्या कर सकता है।
पटना शिक्षक सीट के उम्मीदवार डॉ. संजय यादव को केवल 21 वोट मिले। पटना स्नातक सीट के उम्मीदवार डॉ. असदुल्ला खान को 971 वोट मिले। दरभंगा स्नातक के उम्मीदवार रजनीकांत पाठक पांचवें स्थान पर रहे और उन्हें 3496 वोट मिले। जब कि कोसी स्नातक सीट पर मनोज कुमार जायसवाल को 2297 नोट मिले और वे चौथे स्थान पर रहे।

