
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां रूपी सोरेन के निधन के बाद करीब दो सप्ताह तक पैतृक गांव नेमरा में रहने के पश्चात रांची लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए मां के अंतिम संस्कार से लेकर अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। वहीं, उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश साझा किया।




मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का सात अक्टूबर को निधन हो गया था। इसके अगले दिन आठ अक्टूबर को मुख्यमंत्री अपनी मां के पार्थिव शरीर के साथ पैतृक गांव नेमरा पहुंचे थे। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपनी मां को मुखाग्नि दी और परिवार की परंपराओं के अनुरूप आगे के संस्कारों में भी शामिल हुए।

पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ निभाया राजधर्म
मां के निधन के बाद शोक की इस घड़ी में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी सरकारी जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखा। नेमरा में प्रवास के दौरान वे प्रशासनिक गतिविधियों और जरूरी सरकारी कार्यों पर नजर बनाए रहे। संस्कार भोज के दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और दूर-दराज से पहुंचे लोगों से मुलाकात भी की।

करीब दो सप्ताह तक पैतृक गांव में रहकर मुख्यमंत्री ने अपनी मां को अंतिम विदाई देने के साथ परिवार की परंपराओं के अनुसार सभी आवश्यक संस्कारों में भाग लिया। इसके बाद वे नेमरा से रांची लौट आए।

कल्पना सोरेन ने बताई जड़ों और परंपराओं की अहमियत
मुख्यमंत्री की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी जड़ों और पारंपरिक मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश दिया। उन्होंने लिखा, “हमें हमेशा अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहना चाहिए।”
कल्पना सोरेन का यह संदेश पारिवारिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के महत्व को रेखांकित करता है।

