
रांची। बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं। मां…., मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां रूपी सोरेन के निधन के बाद इन शब्दों के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। मां को खोने का दर्द उनके इस छोटे से संदेश में साफ दिखाई दिया। रूपी सोरेन का बुधवार को रांची के बरियातू रोड स्थित हिल व्यू अस्पताल में निधन हो गया। वह करीब 80 वर्ष की थीं। रूपी सोरेन लंबे समय से बीमार थीं। पिछले कुछ समय से उनका इलाज हिल व्यू अस्पताल में चल रहा था। बुधवार को उनकी तबीयत गंभीर होने के बाद चिकित्सकों ने उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा था। बाद में चिकित्सकों डॉ. दीपक गुप्ता और डॉ. उज्जवल राय ने उनके निधन की जानकारी दी। रूपी सोरेन के निधन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार को गहरे शोक में डाल दिया है। यह परिवार के लिए लगातार दूसरा बड़ा निजी आघात है।



एक साल पहले दिशोम गुरु का हुआ था निधन : करीब एक साल पहले 4 अगस्त 2025 को हेमंत सोरेन के पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन का दिल्ली में निधन हुआ था। पिता के निधन के बाद रूपी सोरेन ही परिवार के लिए सबसे बड़ी भावनात्मक ताकत थीं।
1962 में रूपी सोरेन की हुयी थी शादी : रूपी सोरेन का विवाह एक जनवरी 1962 को शिबू सोरेन से हुआ था। विवाह के बाद वह लगातार उनके साथ रहीं और शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों में परिवार की जिम्मेदारियां संभालती रहीं। शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में शामिल थे। वह झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने रूपी सोरेन को संघर्ष, त्याग और धैर्य की प्रतीक बताते हुए कहा कि शिबू सोरेन के निधन के बाद भी वह उनके संघर्षों में सदैव साथ खड़ी रहीं। पार्टी ने उनके निधन को झारखंड समेत देश के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कहा कि एक मां का साया उठ जाना हेमंत सोरेन, उनके परिवार और पूरे झारखंड के लिए बेहद पीड़ादायक है।

