
बालाघाट। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जहां प्रत्यक्ष रूप से कार्य हो रहा हो, वहां ज्यादा बोलने की आवश्यकता नहीं होती। भाषण से अधिक महत्वपूर्ण कार्य होता है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस का पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा। सरसंघचालक डॉ. भागवत मंगलवार को मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी क्षेत्र स्थित ग्राम कारंजा में बालासाहेब और भाऊराव देवरस स्मृति भवन के लोकार्पण और माधव नेत्रालय के नेत्र चिकित्सा एवं नेत्र जांच केंद्र के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहेब देवरस और ज्येष्ठ प्रचारक भाऊराव देवरस की पैतृक भूमि कारंजा में नवनिर्मित भाऊराव देवरस स्मृति भवन और बालासाहेब देवरस नेत्रालय का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में डॉ. भागवत ने बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया।



भारत की मिट्टी में सेवा और संवेदना के संस्कार
सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कारंजा में कहा कि भारत की मिट्टी और संस्कृति में ही सेवा और संवेदना के संस्कार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 200 वर्षों में भारत में जितने महापुरुष हुए हैं, उतने पूरी दुनिया के इतिहास में कहीं देखने को नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि दूसरों का दुख देखकर आंखें नम होना भारतीय समाज के संस्कारों का हिस्सा है। उन्होंने इस भावना को भारत की मिट्टी और संस्कृति से जोड़ते हुए कहा कि समाज में दूसरों के लिए कुछ करने की प्रवृत्ति हमारे जीवन मूल्यों में रही है।
उन्होंने विमान हादसे के दौरान यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मछर का भी उल्लेख किया। उन्हाेंने कहा कि चाकू से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की और यात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए विमान उड़ाते रहे। उन्होंने इसे भारतीय संस्कारों में मौजूद त्याग और दूसरों के लिए समर्पण की भावना का उदाहरण बताया।

