
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने भारत के चुनाव आयोग में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर भारत के चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।



शीर्ष कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
शीर्ष कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर ECI का जवाब देखने के बाद उसे लगता है कि CEC ने कुछ फैसले बिना ज़रूरी आम सहमति के लिए थे, तो वह उन फैसलों पर दोबारा विचार कर सकता है या उन्हें वापस ले सकता है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस के बाद, अगर वे आकर दिखाते हैं कि ABC फैसले बिना आम सहमति के लिए गए थे, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे।
इस संबंध में दायर याचिका में भारत निर्वाचन आयोग के भीतर सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने की मांग की गई थी। इसके साथ ही, इसमें क्वो वारंटो रिट जारी करने का भी अनुरोध किया गया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने किस अधिकार के तहत कथित तौर पर निर्वाचन आयोग के नाम पर यह फैसला लिया।
याचिका में की गई थी ये मांग
याचिका में तर्क दिया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार किसी एक मुख्य चुनाव आयुक्त को नहीं बल्कि चुनाव आयोग को दिया गया। पेटिशन में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया। इसमें सामूहिक निर्णय लेने का प्रावधान है और जिन मामलों पर सर्वसम्मति नहीं है, उनका निर्णय बहुमत से किया जाएगा

