
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने शाम करीब पांच बजे फैसला सुनाया। अदालत ने 24 धाराओं में से सात धाराओं में सभी अभियुक्तों को दोषी मानते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मृत्युदंड का निष्पादन तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट यह निर्धारित नहीं कर देता कि मृत्युदंड देना उचित है। सभी अभियुक्त फिलहाल जेल में ही रहेंगे। उन्हें फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।



सजा सुनाए जाने के दौरान अभियुक्तों के परिजन अदालत कक्ष के बाहर मौजूद रहे। बीजापुर और दंतेवाड़ा से भी अभियुक्तों के परिजन जगदलपुर पहुंचे थे। सभी 10 दोषी वर्तमान में जगदलपुर केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
विशेष अदालत ने पांच सितंबर को अपने फैसले में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा को दोषी ठहराया था।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। हमले में पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और योगेंद्र शर्मा सहित कई लोगों की मौत हुई थी।

