
पुरी । भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के पारंपरिक स्नान अनुष्ठान का आयोजन सोमवार तड़के 12वीं शताब्दी के मंदिर परिसर में किया गया। इस दौरान देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान यात्रा वार्षिक रथ यात्रा का पूर्व आयोजन मानी जाती है। इस अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाया जाता है और सार्वजनिक रूप से 108 कलशों के जल से पवित्र स्नान कराया जाता है। मंदिर परिसर में बने ऊंचे मंच पर आयोजित इस अनुष्ठान का दर्शन श्रद्धालु मंदिर के सामने स्थित भव्य मार्ग से करते हैं।



वेदी पर विराजमान किए जाने के बाद सेवायतों ने ‘मंगला आरती’ की, जो मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान की पहली आरती होती है। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को खुले मंडप से मंगला आरती के दर्शन का अवसर मिलता है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर परिसर स्थित ‘सुनाकुआ’ के पवित्र जल से भरे कुल 108 कलशों का जल भगवान की प्रतिमाओं पर अर्पित किया जाता है।

