
पटना। सरकारी टेंडर हेराफेरी मामले में विशेष निगरानी इकाई ने ठेकेदार रिशुश्री को पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बुधवार को उसके मीठापुर आवास पर छापेमारी हुयी थी। छापे में करीब दो करोड़ के आभूषण और 61 जमीन के डीड मिले। इसके बाद जांच एजेंसी ने उसे हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की। गुरुवार तड़के गिरफ्तारी की औपचारिक कार्रवाई पूरी की गई। जांच में खुलासा हुआ है कि रिशुश्री सरकारी टेंडर मैनेज करता था। उस पर अफसरों को कमीशन देकर टेंडर प्रभावित करने का आरोप है। नगर विकास, बुडको, भवन निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग जांच के दायरे में हैं। बताया गया कि मनचाही कंपनियों को टेंडर दिलाए जाते थे।इसके बदले आठ से नौ प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। इस कमीशन की हिस्सेदारी कई अधिकारियों तक पहुंचती थी।



जांच एजेंसियों के अनुसार रिशुश्री की छह से सात कंपनियां हैं। इन्हीं कंपनियों के नाम पर वह खुद भी सरकारी काम लेता था। फर्जी बिल पास कराने का भी आरोप उस पर लगा है। सरकारी योजनाओं में बढ़ा-चढ़ाकर राशि स्वीकृत कराई जाती थी। छोटे कर्मचारियों को कमीशन देकर पूरे सिस्टम को सेट किया जाता था। नीचे से ऊपर तक मजबूत नेटवर्क खड़ा करने की बात सामने आई है।
विदेश यात्रा और अफसरों से संबंधों की जांच शुरू : जांच में कुछ अधिकारियों को विदेश भेजने की जानकारी भी मिली है। एजेंसियां अब इस एंगल से भी मामले की पड़ताल कर रही हैं। टेंडर के बदले सुविधाएं देने और लेने के आरोपों की जांच जारी है। पूरे नेटवर्क में कई बड़े नामों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। जांच एजेंसियां डिजिटल दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन खंगाल रही हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियां संभव मानी जा रही हैं।
ईडी पहले से कर रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच : रिशुश्री के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी जांच कर रहा है। ईडी जून और नवंबर में उसके नौ ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम और दिल्ली में भी तलाशी ली गई थी। सहयोगियों, ट्रेवल एजेंटों और रिश्तेदारों के ठिकाने जांच के दायरे में आए।छापेमारी में नकदी, संपत्ति और टेंडर से जुड़े दस्तावेज मिले थे। डिजिटल साक्ष्य भी एजेंसियों ने जब्त किए थे।
68 करोड़ की संपत्ति पहले ही हो चुकी कुर्क : ईडी ने अगस्त महीने में बड़ी कार्रवाई करते हुए संपत्तियां कुर्क की थीं। रिशुश्री और उसके परिवार से जुड़ी संपत्तियों को निशाने पर लिया गया। करीब 68.09 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की गई। जांच एजेंसियां अब धन के स्रोत और लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। सरकारी टेंडर में बड़े भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। मामले ने सरकारी विभागों में भी हलचल बढ़ा दी है।

