
पटना। दुनिया भर में इन दिनों सुपर एल-नीनो को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि साल 2026 में बेहद खतरनाक एल नीनो की स्थिति बन सकती है, जिसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ेगा। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह पिछले 150 सालों के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इसका असर सिर्फ बारिश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खेती, पानी, बिजली और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो सकती है। एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम का संतुलन बिगड़ने लगता है। सामान्य स्थिति में भारत में मानसून मजबूत रहता है, लेकिन एल-नीनो आने पर बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन राज्यों पर पड़ता है, जहां खेती बारिश पर निर्भर करती है। बिहार भी उन्हीं राज्यों में शामिल है।



बिहार में कमजोर पड़ सकता है मानसून : विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सुपर एल-नीनो सक्रिय हुआ तो बिहार में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। जून में स्थिति सामान्य दिख सकती है, लेकिन अगस्त और सितंबर में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है। कम बारिश का सबसे बड़ा असर धान, मक्का, दाल और तिलहन जैसी फसलों पर पड़ेगा। खेतों में पानी की कमी होने से उत्पादन घट सकता है और किसानों की चिंता बढ़ सकती है।
किसानों और गांवों की अर्थव्यवस्था पर असर : बिहार की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। ऐसे में मानसून कमजोर होने का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी जरूरी होता है, लेकिन बारिश कम हुई तो बुआई और फसल दोनों प्रभावित हो सकती हैं। फसल उत्पादन घटने का असर बाजार पर भी दिखाई देगा। अनाज, दाल और खाद्य तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है।
भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा : सुपर एल-नीनो सिर्फ बारिश ही नहीं घटाता, बल्कि तापमान भी बढ़ा सकता है। बिहार में पहले से ही गर्मी और लू का असर बढ़ रहा है। ऐसे में एल-नीनो मजबूत हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर जा सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों पर पड़ेगा। अस्पतालों में गर्मी से बीमार मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
पानी और बिजली संकट की आशंका : अगर बारिश कम हुई तो नदियों, तालाबों और भूजल स्तर पर भी असर पड़ेगा। बिहार के कई इलाकों में लोग भूजल पर निर्भर हैं। लंबे समय तक बारिश नहीं हुई तो पानी का संकट गहरा सकता है। वहीं गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। ज्यादा कूलर, पंखे और एसी चलने से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और ग्रामीण इलाकों में कटौती की समस्या बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार को अभी से सतर्क होने की जरूरत है। किसानों को कम पानी वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। सरकार को जल संरक्षण, बिजली प्रबंधन और राहत योजनाओं की तैयारी पहले से करनी होगी। अगर समय रहते तैयारी नहीं हुई तो सुपर एल-नीनो बिहार में खेती से लेकर आम जिंदगी तक बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

