
कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी में असंतोष और आंतरिक खींचतान के संकेत खुलकर सामने आने लगे हैं। बुधवार को पार्टी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में विधायकों की बेहद कम मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। वहीं, TMC नियंत्रित दो नगर पालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।



विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास आयोजित धरने में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए। यह प्रदर्शन चुनाव के बाद कथित हिंसा, बुलडोजर एक्शन और नई राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे फेरीवालों को हटाने के अभियानों के खिलाफ आयोजित किया गया था। धरने में वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, नयना बनर्जी, संदीपान घोष और ऋतब्रत बनर्जी मौजूद रहे। हालांकि विधायकों की कम उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि पार्टी के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है।
बता दें कि मंगलवार को कालीघाट में हुई पार्टी बैठक में कई विधायकों ने नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना था कि केवल बंद कमरों में बैठकें करने से जनता का भरोसा वापस नहीं मिलेगा। नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी को सड़कों पर उतरकर आक्रामक आंदोलन करना होगा और जनता से सीधे संवाद बढ़ाना होगा। इसी बीच उत्तर 24 परगना जिले की कांचरापाड़ा और हलीशहर नगर पालिकाओं में TMC पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है।
24 में से 15 पार्षदों ने इस्तीफा दिया : कांचरापाड़ा नगर पालिका में 24 में से 15 पार्षदों ने इस्तीफा सौंप दिया, जबकि हलीशहर में 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक रूप से पद छोड़ दिया। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही नगरपालिका नेतृत्व के कुछ हिस्सों में असंतोष पनप रहा था। इसकी मुख्य वजह सक्रिय नेतृत्व की कमी और नगरपालिका के कामकाज को लेकर जताई जा रही चिंताएं थीं। सूत्रों ने यह भी बताया कि बीजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने हाल ही में नगरपालिका अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी। इस्तीफा देने का यह फ़ैसला रविवार को कल्याणी में हुई टीएमसी पार्षदों की एक बैठक के दौरान लिया गया था।

