
नयी दिल्ली। पूरे दक्षिण एशिया में अपनी खनकती आवाज के जादू से करीब आठ दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाली सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका पद्म विभूषण आशा भोसले रविवार को अपनी सुरमयी यात्रा को विराम देकर अनंत में विलीन हो गयीं। आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को गोआर, सांगली में हुआ था, जो उस समय सांगली की रियासत (अब महाराष्ट्र में) का हिस्सा था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर मराठी और कोंकणी थे। उनकी माता शेवंती (गुजराती) थीं। आशा भोसले के पिता एक सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और मराठी संगीत मंच पर अभिनेता और थे।नौ साल की उम्र में उनके पिता का देहांत हो गया और उनका परिवार पुणे से कोल्हापुर और फिर मुंबई चला गया। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्होंने और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर ने फिल्मों में गाना और अभिनय करना शुरू कर दिया। आशा का पहला फिल्मी गीत मराठी फिल्म ‘माझा बाई’ (1943) का चला चला नव बाला था। इसका संगीत दत्ता दावजेकर ने तैयार किया था। उन्होंने 1948 में हिंदी फिल्म चुनरिया’ के लिए सावन आया गीत गाया। यह उनकी पहली हिंदी फिल्म थी, जिससे उन्होंने अभिनय की शुरूआत की। उनका पहला एकल हिंदी फिल्मी गीत 1949 में फिल्म ‘रात की रानी’ के लिए था। 16 साल की उम्र में उन्होंने अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध 31 वर्षीय गणपतराव भोसले से शादी कर ली।आशा की शादी कामयाब नहीं रही। उनके पति गणपतराव ने उन्हें घर से निकाल दिया। अपने तीसरे बच्चे की गर्भावस्था के दौरान वह दो बच्चों के साथ मायके लौट आईं। उन्होंने गीत गाकर, पैसे कमाकर और बच्चों की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए अपना जीवन जारी रखा।उन्होंने 1950 के दशक में हिंदी फिल्मों के अधिकांश पार्श्व गायकों की तुलना में कहीं अधिक गाने गाए। इनमें से अधिकतर गाने कम बजट वाली फिल्मों में थे। उन्हें शुरूआती लोकप्रियता परिणीता (1953), बूट पॉलिश (1954), सीआईडी (1956) और नया दौर (1957) जैसी फिल्मों के लिए गाए गए गानों से मिली।कहा जाता है कि ओपी नैय्यर ने आशा भोसले को उनकी पहचान दिलाई। ओपी नैय्यर और आशा भोसले के कुछ गाने मधुबाला (हावड़ा ब्रिज, 1958) और ये है रेशमी जुल्फों का अंधेरा, (मेरे सनम, 1965) पर फिल्माए गए आइए मेहरबान हैं। आओ हुजूर तुमको (किस्मत) और जाइये आप कहाँ (मेरे सनम) आदि हैं। उन्होंने तुमसा नहीं देखा (1957), एक मुसाफिर एक हसीना (1962), और कश्मीर की कली (1964) जैसे गाने रिकॉर्ड किए। नैय्यर ने अपने सबसे लोकप्रिय युगल गीतों जैसे उड़े जब जब जुल्फें तेरी (नया दौर), मैं प्यार का राही हूं” (एक मुसाफिर एक हसीना), दीवाना हुआ बादल” और “इशारों इशारों में” (कश्मीर की कली) के लिए मोहम्मद रफी और आशा जी के युगल गीतों का भी इस्तेमाल किया।आशा भोसले से संगीतकार रवि ने कई लोकप्रिय गाने गवाये। उन्होंने अपनी पहली फिल्म वचन के लिए गीत गाए थे। हम सभी को इस फिल्म का मधुर लोरी गीत चंदा मामा दूर के याद है, जो बच्चों का सदाबहार पसंदीदा गीत है। उन्होंने कई फिल्मों के लिए भजन भी गाए। उनका एक भजन तोरा मन दर्पण (काजल) बेहद लोकप्रिय हुआ था। वक्त, चौदहवीं का चांद, गुमराह, बहू बेटी, चाइना टाउन, आदमी और इंसान, धुंध, हमराज आदि जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए भी गाने रिकॉर्ड किए। सचिन देव बर्मन या एस.डी बर्मन ने काला पानी, काला बाजार, इंसान जाग उठा, लाजवंती, सुजाता और तीन देवियां (1965) जैसी फिल्मों में कई हिट गाने दिए। इनमें सबसे मशहूर गाना बिमल रॉय की फिल्म बंदिनी (1963) का अब के बरस था। इसी तरह ज्वेल थीफ (1967) का मोहक गाना रात अकेली है भी काफी लोकप्रिय हुआ और यह तनुजा पर फिल्माया गया था।




