
नयी दिल्ली । सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण बनी परिस्थितियों को देखते हुए सिलेंडर और पाइप से आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस पर दबाव कम करने के लिए होटलों और रेस्तरां में केरोसिन और कोयले के ईंधन के रूप में इस्तेमाल की अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा सीमित संख्या में वाणिज्यिक इस्तेमाल के सिलेंडरों की भी आपूर्ति की जायेगी जिसके लिए राज्य सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर लाभार्थियों की सूची बनानी होगी।



सरकार ने गुरुवार को एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग 45 दिन के अंतराल पर ही की जा सकेगी। इससे पहले शहरी क्षेत्रों के लिए यह अवधि 25 दिन कर दी गयी थी।
सरकार की ओर से बताया गया कि पश्चिम एशियाई देशों से अब तक एक लाख 30 हजार भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं और विभिन्न देशों से उडानों का संचालन हो रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में फंसे विभिन्न देशों के जहाजों पर 78 भारतीय नाविक थे जिनमें से 70 सुरक्षित निकाल लिये गये हैं जबकि चार घायल हैं और दुर्भाग्य से तीन की मौत हुई है जबकि एक लापता है। सरकार ने कहा है कि इस पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष में वहां रहे भारतीयों में से 20 से अधिक घायल हुए हैं जिनमें से अधिकतर उपचार के बाद घर लौट गये हैँ जबकि एक – दो की हालत गंभीर है।
विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए उचित कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि देश में गैस और पेट्रोल डीजल की आपूर्ति लगातार बनी हुई और देश के किसी भी हिस्से से इन पदार्थों की कोई कमी होने की सूचना नहीं है। लोग सिलेंडरों की बुकिंग में हड़बड़ी ने करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा ,” देशभर में हमारे लगभग 25,000 वितरक हैं और हम प्रतिदिन लगभग 50 लाख सिलेंडरों की आपूर्ति करते हैं। वितरण के स्तर पर भी कहीं भी गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं है, लेकिन घबराहट के कारण बुकिंग में कई गुना वृद्धि हुई है। हम नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे घबराहट में बुकिंग न करें और इस वैश्विक अनिश्चितता के दौर में जहाँ भी संभव हो ईंधन की बचत करें।”
उन्होंने कहा कि रसोई गैस के अलावा अन्य ईंधनों को भी उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि एलपीजी और गैस पर दबाव कम किया जा सके। उन्होंने कहा,” आज एक आदेश जारी किया गया है जिसके तहत अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन राज्यों को दिया जाएगा। यहाँ भी लाभार्थियों की पहचान और वितरण में राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।”
सुश्री शर्मा ने कहा कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को सलाह दी है कि इस संकट अवधि के दौरान एक महीने के लिए आतिथ्य और रेस्तरां क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन—जैसे बायोमास, आरडीएफ पैलेट, केरोसिन या कोयला—के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि अधिक संस्थान इनका उपयोग कर सकें और प्राथमिक उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि इसके अलावा कोयला मंत्रालय ने भी कल एक पत्र जारी किया है, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड और सिंगरेनी को राज्यों को अधिक मात्रा में कोयला आवंटित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि छोटे, मध्यम और अन्य उपभोक्ताओं को आपूर्ति की जा सके।
संयुक्त सचिव ने कहा कि वाणिज्यिक सिलेंडरों के इस्तेमाल में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। बाकी उपभोक्ताओं के लिए तेल विपणन कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है जिनकी समीक्षा के बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि कुछ वाणिज्यिक सिलेंडर भी जारी किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इसमें राज्य सरकारों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। तेल विपणन कंपनियों के माध्यम से राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे लाभार्थियों की सूची तैयार करें ताकि वाणिज्यिक सिलेंडरों की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर की जा सके। इसका उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकना भी है।

