
पटना। दस हजारी के रूप में जानी जा रही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का लाभ उस प्रत्येक महिला को मिलेगा, जिसने इसके लिए आवेदन किया है। मंगलवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण चौधरी ने विधानसभा को इससे अवगत कराया। वे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण विकास विभाग के बजट प्रस्ताव पर सरकार का पक्ष रख रहे थे।



237 अरब एक करोड़ 17 लाख 90 हजार के विभागीय बजट में सर्वाधिक 90 अरब रुपये का प्रविधान इसी योजना के लिए हुआ है। मंत्री ने बताया कि महिलाएं इस राशि से बेहतर काम कर रहीं। जो महिलाएं अपना रोजगार बेहतर ढंग से चलाएंगी, उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत 26 सितंबर, 2025 अब तक छह चरण में 1.81 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये दिए जा चुके हैं। इनमें मात्र 12 लाख महिलाएं शहर की हैं और शेष ग्रामीण क्षेत्र की।
श्रवण ने विपक्ष के नेताओं पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। हालांकि, उस दौरान विपक्ष के अधिसंख्य सदस्य सदन में नहीं थे। वामदलों के तीन सदस्य रह गए थे। अंतिम समय में वे भी सदन से बाहर चले गए। अंतत: विधानसभा ने ग्रामीण विकास विभाग सहित कई अन्य विभागों की मांग को गिलोटिन के माध्यम से ध्वनिमत से स्वीकृत कर दिया।
इसी के साथ विपक्ष की ओर से प्रस्तुत 10 रुपये का कटौती प्रस्ताव निरस्त हो गया। यह प्रस्ताव राजद के राहुल शर्मा और दूसरे सदस्य ले आए थे। उस पर चर्चा के दौरान जीविका, मनरेगा, आवास योजना आदि में लूट-खसोट और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए। इसे निराधार बताते हुए सरकार ने आरोपों का संज्ञान नहीं लिया।
मंत्री ने बताया कि आवास-विहीन 20 लाख ग्रामीणों ने पक्के मकान के लिए आवेदन किया है। प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में बिहार को 12 लाख 19 हजार आवासों का लक्ष्य मिला है। केंद्र ने सर्वाधिक लक्ष्य बिहार को दिया।
बहरहाल, पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए गांव-देहात के एक करोड़ चार लाख 90 हजार लोगों की सूची बनाई गई है। केंद्र से स्वीकृति मिलते ही उन गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध करा दिया जाएगा। आवास निर्माण के लिए एक लाख 55 हजार 750 रुपये दिए जाते हैं। इसमें 12 हजार रुपये शौचालय मद के होते हैं।

