
नयी दिल्ली । पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व में मची खलबली को स्वीकार करते हुए कहा कि इस दौरान उन्हें बंकर में शरण लेने की सलाह दी गयी थी।
श्री ज़रदारी ने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि उनके सैन्य सचिव ने उन्हें सूचित किया कि युद्ध शुरू हो चुका है और सुरक्षा कारणों से उन्हें बंकर में जाना चाहिए। श्री ज़रदारी ने कहा कि उन्होंने चार दिन पहले ही आशंका जता दी थी कि युद्ध हो सकता है। शनिवार को आयोजित एक इवेंट में बोलते हुए पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खुलासा किया कि मई में हुए भारत के हमले के बाद उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें सुरक्षा के लिए तुरंत एक बंकर में जाने के लिए बोला था। हालांकि, जरदारी ने बताया कि उन्होंने अपनी सेना से खुद के बंकर में जाने के लिए मना कर दिया।



‘सर, जंग शुरू हो गई’
पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने कहा, “मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी वहीं थे। वह मेरे पास आए और बोले, सर, जंग शुरू हो गई है। मैंने असल में चार दिन पहले ही उनसे कहा था कि जंग होने वाली है, लेकिन वह मेरे पास आए और बोले, सर, चलिए बंकर में चलते हैं। मैंने कहा, ‘अगर शहादत आनी है, तो यहीं आएगी। लीडर बंकर में नहीं मरते। वे युद्ध के मैदान में मरते हैं। वे बंकर में बैठे-बैठे नहीं मरते।’”
जरदारी ने कहा कि उनकी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का हर कार्यकर्ता देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की पाकिस्तान को दी गई चेतावनी, रोटी खाओ, वरना मेरी गोली तो है ही पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि गोलियां पाकिस्तान ही चलाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की इकॉनमी पाकिस्तान से 10 गुना बड़ी हो सकती है, लेकिन युद्ध लड़ने की ‘हिम्मत’ उसे कहां से मिलेगी।

