
पटना। विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद बिहार कांग्रेस एक बार फिर स्वतंत्र राह पर चलने की तैयारी में है। 15 वर्षों के बाद पार्टी के अंदर एक बार फिर एकला चलो की रणनीति पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है।सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में जहां नेताओं ने स्वतंत्र पहचान पर बल दिया, वहीं संगठन की मजबूती के लिए प्रदेश स्तर पर सघन दौरों का निर्णय भी लिया गया।



दिल्ली में पार्टी की बिहार में पराजय के बाद पटना में प्रदेश नेतृत्व के स्तर पर बैठक बुलाई गई थी। इस समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने दो टूक कहा कि लगातार राजद के साथ चलने से कांग्रेस की वैचारिक और संगठनात्मक पहचान धूमिल हुई है। जनता में कांग्रेस की अलग छवि तभी बनेगी, जब पार्टी अपनी राजनीतिक लड़ाई खुद लड़ेगी और मजबूत प्रत्याशी तैयार करेगी।
बैठक में नेताओं ने यह भी कहा कि गठबंधन की राजनीति ने कांग्रेस को सीट-शेयरिंग से आगे सोचने ही नहीं दिया, जिससे स्थानीय नेतृत्व कमजोर पड़ा। कई नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी को राजद पर निर्भरता कम कर संगठन को जिला स्तर तक फिर से खड़ा करने की स्पष्ट रोडमैप बनाना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने भी संकेतों में कहा कि गठबंधन चुनावी होते हैं, और जब चुनाव आएंगे, तब आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बैठक में नेताओं ने निर्णय लिया कि पार्टी पूरे प्रदेश में वोट चोरी के खिलाफ ठोस मुहिम चलाएगी। संगठन को जिला से लेकर पंचायत तक सुदृढ़ करने का काम होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार जिलों का सघन दौरा करेंगे। जनता के बीच उनके मुद्दों के साथ सड़क से सदन तक कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।
बैठक में दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ 14 को होने वाली रैली की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। देर शाम पार्टी के सभी छह विधायकों के साथ भी प्रभारी कृष्णा अल्लावारू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने बैठक की। बैठक में विधानमंडल दल के पूर्व नेता शकील अहमद खान, सभी जिलाध्यक्ष, फ्र ंटल संगठन के प्रमुख और वरिष्ठ नेतागण मौजूद रहे।

