
लखनऊ। बिहार विधानसभा चुनाव का परिणाम कई मायनो में काफी महत्वपूर्ण रहा है। इस विधानसभा चुनाव परिणाम ने जातीय समीकरणों को तहस-नहस कर दिया। बिहार में जातीय गोलबंदी कर रिजल्ट को अपने पक्ष में करने के प्रयास बुरी तरह से फेल हुए हैं। लोकसभा चुनाव के अति उत्साह और जीत के अति आत्मविश्वास से इतर भाजपा एवं एनडीए नेताओं ने जमीन पर उतर कर काम किया। संगठन को मजबूत किया गया। असर सीधे चुनावों में दिख रहा है। उत्तर प्रदेश से बिहार पहुंचकर पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स को धार देने की कोशिश कर रहे अखिलेश यादव को सफलता नहीं मिल पाई। वहीं राहुल गांधी का एसआईआर पर निशाना साधना और तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता में वापसी की कोशिश नाकामयाब रही। सबसे बड़ा धक्का राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से लगा है।




यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंडल की राजनीति से छनकर आए लालू यादव की पॉलिटिक्स को उनके घर में ध्वस्त किया। दानापुर में जातीय समीकरणों पर बटेंगे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे वाला नारा प्रभावी हुआ। सीएम योगी की रैली में उमड़ी भीड़ ने रामकृपाल यादव के पक्ष में माहौल बना दिया था। बाद के समय में पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती इसकी काट के लिए लगातार दानापुर में कैंप करती रहीं, लेकिन राजद प्रत्याशी रीतलाल राय को जीत दिलाने में कामयाब नहीं हो सकीं।
दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार चुनाव के मैदान में उतरकर 31 रैली और सभाएं कीं। इनमें से एनडीए के उम्मीदवारों ने 27 पर जीत दर्ज की है। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनके प्रबल प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिहार की 22 सीटों पर प्रचार किया। महागठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन महज दो सीटों पर जीत दिला पाने में वे कामयाब हो सके।
टूट गया सामाजिक समीकरण : लालू यादव के दानापुर से उतरने के बाद दावा किया जा रहा था कि इस सीट पर रीतलाल यादव की जीत तय है। यादव और मुस्लिम एकमुश्त राजद को वोट देगा। माय समीकरण के सूत्रधार के चुनावी मैदान में उतरने का असर चुनावी रिजल्ट प्रकाशन के दौरान भी दिखा। रीतलाल यादव ने लंबे समय तक रामकृपाल यादव पर बढ़त बनाए रखी। हालांकि, शहरी क्षेत्र का ईवीएम खुलने के साथ ही खेल बदल गया। दरअसल, सीएम योगी ने दानापुर से परिवारवाद से लेकर घोटालों और जंगलराज तक की याद दिला दी थी। यूपी में माफियाओं पर एक्शन से लेकर राम मंदिर तक की चर्चा के जरिए उन्होंने जातीय समीकरण को पाटने की कोशिश की।
लालू ने तीन सीटों पर किया था प्रचार, रिजल्ट जीरो : लालू प्रसाद यादव ने इस चुनाव में दानापुर के अलावा फुलवारीशरीफ विधानसभा सीट पर भी रोड शो के जरिए प्रचार किया था। इसके अलावा चुनाव की घोषणा से पहले वे एकमा विधानसभा क्षेत्र में गए थे। दरअसल, एकमा से राजद उम्मीदवार पूर्व विधायक श्रीकांत यादव को लालू परिवार के काफी करीबी माना जाता है। लेकिन, फुलवारीशरीफ और एकमा में जदयू को जीत मिली। फुलवारीशरीफ से जदयू के श्याम रजक और एकमा से मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को एक बार फिर जीत मिली। इस प्रकार बिहार चुनाव में लालू बेअसर साबित हुए और उनके हाथ कोई सफलता नहीं लगी।

