
वाशिंगटन। भारतीय वस्तुओं पर नए टैरिफ का असर अमेरिकियों की रसोई पर भी पड़ेगा। वजह यह है कि नए टैरिफ से भारत से आयात होने वाले मसाले महंगे हो जाएंगे जिससे खाने की लागत बढ़ जाएगी। एक व्यापार संघ ने बुधवार को चेतावनी दी कि घरों की रसोइयों, रेस्टोरेंट एवं बड़े निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कई मसाले भारत से आयात किए जाते हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से लागत बढ़ सकती है।अमेरिकी कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष अमेरिका ने भारत से 41 करोड़ डॉलर से ज्यादा के मसाले आयात किए थे।



अमेरिकन स्पाइस ट्रेड एसोसिएशन की कार्यकारी निदेशक लारा शुमो ने एक बयान में कहा कि दालचीनी, काली मिर्च, जायफल और लौंग सहित कई जरूरी मसालों को उष्णकटिबंधीय (ट्रोपिकल) जलवायु की आवश्यकता होती है और इसलिए मांग पूरी करने के लिए इन्हें बड़े पैमाने पर अमेरिका में नहीं उगाया जा सकता।
जून के अंत में ‘मैककार्मिक’ के अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप की टैरिफ नीति से मसाला कंपनी को सालाना नौ करोड़ डालर का नुकसान हो सकता है। शुमो ने कहा, ”इन उत्पादों पर टैरिफ (इसमें इस सप्ताह घोषित अतिरिक्त नए टैरिफ भी शामिल हैं) अमेरिकी उत्पादन को प्रोत्साहित नहीं करते या अमेरिकी रोजगार पैदा नहीं करते। इसके बजाय ये अमेरिकी खाद्य निर्माताओं, रेस्टोरेंट और अंतत: अमेरिकी उपभोक्ताओं पर अनुचित वित्तीय बोझ डालते हैं।”
ट्रंप के इस टैरिफ के बाद भारत एशिया में अमेरिका का सबसे ज्यादा टैरिफ का सामना करने वाला व्यापारिक साझेदार बन गया है। टैरिफ के मामले में भारत और ब्राजील बराबरी पर खड़े हैं। दोनों ही देश भारी टैरिफ का सामना कर रहे हैं। ट्रंप के नए टैरिफ के ऐलान के बाद ज्यादातर भारतीय निर्यातकों का कहना है कि वे मुश्किल से 10-15% की वृद्धि को झेल पाएंगे, 50% टैरिफ उनकी क्षमता से बहुत ज्यादा है।
ट्रंप के टैरिफ पर चीन ने जताई नाराजगी : पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले ट्रंप के टैरिफ के फैसले पर अब चीन ने भी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत सहित अन्य सभी देशों पर ट्रंप के टैरिफ लगाए जाने की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। चीन ने कहा है कि अमेरिका अन्य देशों को दबाने के लिए टैरिफ को हथियार बना रहा है।

