
रांची। झारखंड की नियोजन नीति में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका भाषाओं को शामिल किए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन, रांची में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से मुलाकात की।



मुलाकात के दौरान प्रतिनिधियों ने राज्य में इन भाषाओं को बोलने वाले नागरिकों की संख्या, उनकी सामाजिक भागीदारी और भाषायी पहचान पर विस्तार से अपने सुझाव साझा किए। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इन्हें राज्य की स्थानीय भाषाओं की सूची में शामिल कर सरकारी सेवाओं और रोजगार में समान अवसर दिया जाए।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस संबंध में अपने सोशल मीडिया एक्स पर पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुना गया है। राज्य सरकार इस मुद्दे पर न्यायसंगत निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार झारखंड की भाषायी विविधता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है ताकि एक समावेशी और समानतामूलक समाज की मजबूत नींव रखी जा सके।

