
नई दिल्ली । ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के एयर डिफेंस HQ-9 और रडार सिस्टम को तबाह कर दिया। भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी POK में जबरदस्त एयरस्ट्राइक की, जिससे पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को तबाह कर दिया। सोशल मीडिया पर ये सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पाकिस्तान का कैसा एयर डिफेंस सिस्टम है, जो भारत की स्कैल्प मिसाइलों और मिलिट्री ड्रोन का पता नहीं लगा पाया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या ये भी चाइनीज माल है? इससे आगे बढ़कर भी पूछा जा रहा है कि क्या पाकिस्तान का परमाणु बम भी चाइनीज है?



चीन से चोरी किए परमाणु बम का डिजाइन : पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम यूरोप और चीन से चुराई गई डिजाइनों और तकनीक पर निर्भर था। उसने परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल करने के लिए हर दांव-पेंच अपनाया। 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक तक यह कार्यक्रम परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। पाकिस्तान के तत्कालीन लीडर जुल्फिकार अली भुट्टो ने परमाणु कार्यक्रम पर काम करने के निर्देश दिए। यह भारत और इजरायल दोनों के लिए चिंता की बात थी।
71 की जंग का बदला लेने के लिए परेशान : भारत को अपनी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ से पता चला कि पाकिस्तान इस्लामाबाद के पास कहूटा में परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत तब दगाबाज पाकिस्तान से 1965 के युद्ध और 1971 के युद्ध का बदला लेने के लिए सोच रहा था। जब पाकिस्तान के परमाणु हथियार विकसित करने की खबर आई। रॉ को संदेह हो चुका था पाकिस्तान परमाणु संयंत्र तैयार करने पर काम शुरू कर चुका है, इसलिए रॉ ने पाकिस्तान में मौजूद अपने एजेंटों को सक्रिय किया। अपने गुप्त अभियान में रॉ ने पाया कि यह परमाणु अभियान इस्लामाबाद के नजदीक कहूटा में चलाया जा रहा है।
पाकिस्तान के परमाणु प्रोग्राम के शुरुआत की पुष्टि के लिए रॉ के एजेंटों ने कहूटा के उस सैलून से बालों के सैंपल हासिल किए, जहां कहूटा संयंत्र के परमाणु वैज्ञानिक अपने बाल कटवाने जाते थे। सैंपल को भारत भेजा गया, जहां वैज्ञानिक परीक्षणों में मालूम चला कि उन बालों में रेडियोएक्टिव गुण मौजूद थे, जिससे स्पष्ट हो रहा था कि ये वैज्ञानिक जहां काम कर रहे हैं वहां परमाणु संयंत्र संबंधित अभियान चलाया जा रहा था।

