
नई दिल्ली । बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर में भारतीय सेना ने असगर को मार गिराया। अब्दुल रऊफ असगर जैश प्रमुख मसूद अजहर का छोटा भाई और आईसी 814 अपहरण, पठानकोट फिदायीन हमले और पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड है। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर भारत के आॅपरेशन सिंदूर स्ट्राइक में मारे गए लोगों में से एक के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान के वरिष्ठ सेना अधिकारियों की मौजूदगी ने अटकलों को जन्म दे दिया कि अब्दुल रऊफ असगर मारा गया है।



रऊफ को गृह मंत्रालय ने अक्टूबर 2020 में यूएपीए के तहत एक व्यक्तिगत आतंकवादी के रूप में नामित किया था। प्रतिबंध अधिसूचना के अनुसार, वह पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण शिविर स्थापित करने और पाकिस्तान की धरती से भारत में आतंकवादी हमले आयोजित करने में शामिल था। वह अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या सहित कई अन्य आतंकी हमलों के लिए भी वांछित है।
बीजेपी ने कहा कि रऊफ को खतम कर दिया गया है। कंधार अपहरण के पीछे मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड के रूप में उसकी भूमिका को याद करते हुए, जिसे उसने अपने भाई मसूद, पठानकोट हमले और 2001 के संसद आतंकवादी हमले की रिहाई के लिए अंजाम दिया था। मसूद ने टारगेट तो चुने लेकिन बारीक योजना बनाने से दूर रहा। इस तरह के डिटेल अपने छोटे भाई पर छोड़ दिए।
माना जाता है कि रऊफ जैश का वास्तविक मुखिया है, जो इसके सभी आॅपरेशनों का मैनेजमेंट करता है। इसके शीर्ष फिदायीनों के प्रशिक्षण की देखरेख करता है और भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिश रचता है। माना जाता है कि मसूद खुद इस्लामाबाद या रावलपिंडी में किसी अज्ञात स्थान पर पाकिस्तानी अधिकारियों की सुरक्षात्मक हिरासत में है। रऊफ ने भारतीय एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के कंधार हाइजैक के ऑपरेशन को साजिश कर के अंजाम दिया था। यह घटना 24 दिसंबर 1999 को घटित हुई थी, जब काठमांडू से दिल्ली जा रही फ्लाइट IC-814 को पांच आतंकवादियों ने हाइजैक कर लिया। आतंकी विमान को पाकिस्तान, अमृतसर, दुबई और फिर कंधार, अफगानिस्तान में स्थित तालिबान-नियंत्रित क्षेत्र तक ले गए थे। हाइजैक का मुख्य उद्देश्य था कि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर को रिहा किया जाए। इस पूरी साजिश की योजना अब्दुल रऊफ अजहर ने बनाई थी और वह इसमें सक्रिय रूप से शामिल था।
जैश-ए-मोहम्मद का संचालन करता था रऊफ
भारत ने इस आतंकवादी गतिविधि को नाकाम करने के लिए कड़ा कदम उठाया, और अंत में रऊफ अजहर को मार दिया गया। अब वह भारत के मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की सूची से बाहर हो चुका है। रऊफ अजहर, जो आज भारत की मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की सूची में शामिल है, का जन्म 1975 में हुआ था। बचपन से ही उसका जीवन कट्टरपंथ और हिंसा की ओर ढलता चला गया। उसके भीतर बचपन से ही ऐसा ज़हर भर दिया गया था कि मात्र 24 वर्ष की उम्र में उसने इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 के हाईजैक की साजिश रच डाली। एक ऐसी आतंकी गतिविधि जिसे भारत आज भी नहीं भूला है। रऊफ, जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन में केंद्रीय भूमिका निभाता रहा है। वह न केवल मसूद अजहर का छोटा भाई है, बल्कि संगठन की रणनीति और संचालन में भी गहरी पैठ रखता है। जब मसूद अजहर खराब स्वास्थ्य के चलते सक्रिय भूमिका से हट गया था, तब जैश का पूरा संचालन रऊफ अजहर ने अपने हाथ में ले लिया था।

