
नयी दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की चेतावनी के बाद भी सांसद निशिकांत दुबे की विवादित बयानबाजी जारी है। सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद निशिकांत दुबे ने अब पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाइ कुरैशी पर निशाना साधा है। इंटरनेट प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में निशिकांत दुबे में एसवाई कुरैशी को ”मुस्लिम आयुक्त” करार दिया।हैरानी की बात है कि दुबे ने वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ कुरैशी के तीन दिन पुराने पोस्ट का जवाब देते हुए हमला बोला। दरअसल एसवाई कुरैशी ने गुरूवार को पोस्ट कर वक्फ अधिनियम को निस्संदेह मुसलमानों की जमीन पर कब्जा करने के गलत मंशा से लाई गई सरकार की एक योजना है।
उन्होंने भरोसा जताया था कि सुप्रीम कोर्ट सरकार की इस मंशा का पदार्फाश करेगा। कुरैशी के अनुसार वक्फ अधिनियम में संसोधन के पहले सरकार के दुष्प्रचार मशीन ने अच्छी तरह से इसके बारे में गलत जानकारी फैलाई थी। निशिंकांत दुबे में तीन बाद इस पोस्ट को संज्ञान में लेते हुए कुरैशी पर जमकर हमला बोला। निशिकांत दुबे में कुरैशी पर हमला करते हुए कहा कि ” आप चुनाव आयुक्त नहीं, मुस्लिम आयुक्त थे”।



दुबे ने आरोप लगाया कि कुरैशी के मुख्य चुनाव आयुक्त रहते हुए ही झारखंड के संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठिया को सबसे ज्यादा वोटर बनाया गया। मुसलमानों की जमीन कब्जा करने की गलत मंशा से लाए गए वक्फ संशोधन कानून के कुरैशी के आरोप का जवाब देते हुए दुबे में कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब का इस्लाम भारत में 712 में आया। उसके पहले तो यह सारी जमीन हिंदुओं की या उसी आस्था से जुड़ी आदिवासी, जैन या बौद्ध धर्मावलंबियों की थी।
निशिकांत दुबे में अपने गांव विक्रमशिला का उदाहरण दिया, जबां स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय को बख्तियार खिलजी ने 1189 में जला दिया था। उनके अनुसार विक्रमशिला विश्वविद्यालय ने दुनिया को पहला कुलपति अतिश दीपांकर के तौर पर दिया। निशिकांत दुबे में एसवाई कुरैशी को देश को जोड़ने और इतिहास पढ़ने की सलाह दी।
सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से आगे जा रहा: उन्होंने कहा कि तोड़ने वाली मानसिकता के कारण ही पाकिस्तान बना, लेकिन अब फिर देश का बंटवारा नहीं होगा। ध्यान देने की बात है कि शनिवार को निशिकांत दुबे ने वक्फ संशोधन कानून पर सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों को लेकर हमला बोलते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं से आगे जा रहा है। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश पर देश को अराजकता की ओर ले जाने का आरोप लगाया था।
उन्होंने एक्स पर लिखा कि ”कानून यदि सुप्रीम कोर्ट ही बनाएगा तो संसद भवन को बंद करन देना चाहिए। ” वैसे जेपी नड्डा ने निशिकांत दुबे के बयान को निजी बताते हुए साफ कर दिया कि इसका पार्टी से कोई लेना देना नहीं है। जेपी नड्डा ने निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा को आगे इस तरह की बयानबाजी नहीं करने की हिदायत भी दी थी।

