
पटना। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बारे में उनके विरोधी कई तरह की बातें कहते हैं। नीतीश कुमार के साथ सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तो नीतीश कुमार को अचेत साबित करने का अभियान ही छेड़ दिया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाते रहे हैं। पर, ऐसा कहने या सोचने वाले भूल जाते हैं कि जवानी में हल जोतने वाला बैल बुढ़ापे में हल जोतने की कला नहीं भूलता। भोजपुरी इलाके में यह कहावत भी प्रचलित है- बूढ़ बैल हराई ना भुलाला।



नीतीश को मानसिक रूप से बीमार बता कर सत्ता में उनकी विरासत का दावेदार बनने के लिए तेजस्वी की लार तब से टपकती रही है, जब दो बार नीतीश की कृपा से वे डेप्युटी सीएम बन गए। नीतीश को बूढ़ा, बीमार और लाचार बताने का वे कोई मौका अब नहीं चूकते। महागठबंधन की गुरुवार को हुई बैठक के बाद तेजस्वी ने फिर नीतीश कुमार को अचेत बताया है। विपक्षी नेताओं ने तो उनके हाव-भाव और बोलने के अंदाज को लेकर न सिर्फ सार्वजनिक बयान देना शुरू किया है, बल्कि सोशल मीडिया पर मीम्स की भरमार भी लगा दी है।
खैर, बड़ी चालाकी से नीतीश ने वक्फ मुद्दे पर सहयोगी भाजपा से संबंधों को भी बनाए रखा और अपनी सारी आपत्तियां भी मनवा लीं। जेडीयू के बड़े मुस्लिम नेताओं ने वक्फ के मुद्दे पर विपक्ष के प्रहारों का जबरदस्त प्रतिकार किया। मीडिया के सामने उन नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि वक्फ बिल पर जेडीयू के समर्थन की वजहें क्या रहीं। जेडीयू ने पांच आपत्तियां इस मुद्दे पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को दर्ज कराईं, उसे बिल में शामिल कर लिया गया। इसके बाद बिल के विरोध का कोई औचित्य ही नहीं रह गया था।
मुस्लिम नेताओं ने संभाला मोर्चा : पर, क्या सच में ऐसा है, जैसा नीतीश के बारे में विपक्ष बता रहा है? वक्फ के मुद्दे पर नीतीश नहीं बोल रहे। इससे जाहिर है कि विपक्ष का साहस बढ़ा होगा। जेडीयू के कुछ छोटे नेताओं ने शायद इसी वजह से नीतीश को गुनहगार मान लिया और आनन-फानन इस्तीफे सौंप दिए। अब नीतीश के लिए आवश्यक हो गया था कि वे कुछ करें। जेडीयू के कुछ बड़े मुस्लिम नेताओं को उन्होंने मैदान में उतार दिया। मुस्लिम कम्युनिटी के जो जेडीयू नेता वक्फ संशोधन को लेकर आसमान सिर पर उठाए हुए थे, उन्हें इन लोगों ने जवाब दे दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि जेडीयू ने क्यों बिल का समर्थन किया। इसके साथ ही जोरदार ढंग से यह स्थापित किया नीतीश कैसे मुसलमानों के हितैषी हैं।
चुप रहे, पर एक्शन से नहीं चूके : राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण मुद्दे के समर्थन या विरोध में नीतीश की चुप्पी को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। वैसे संवेदनशील मुद्दों पर जल्दी न बोलने की उनकी आदत भी रही है। जहरीली शराब से मौत हो या मिड डे मील से स्कूली बच्चों की मौत का मामला, वे तब तक चुप रहे, जब तक जांच का परिणाम सामने नहीं आया। हां, वे एक्शन से पीछे नहीं हटे। गोपालगंज जहरीली शराब मामले और सारण मिड डे मील मामले में सजा भी हो चुकी है।

