
लखनऊ। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और घायलों को त्वरित इलाज करने के लिए योगी सरकार कई बड़े कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर फूड प्लाजा की तरह अस्पतालों की व्यवस्था की जाए।सभी मंडल मुख्यालयों के अस्पतालों में ट्रामा सेंटर, एंबुलेंस एवं प्रशिक्षित स्टाफ को तैनाती भी सुनिश्चित की जाए। एक्सप्रेस-वे के किनारे की शराब की दुकानों को हटाया जाए।



दुर्घटनाओं के वार्षिक आंकड़ों पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में 46,052 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं। इसमें 34,600 लोग घायल हुए हैं, जबकि 24 हजार से अधिक मौतें हुई हैं, जो कि अत्यंत दुखद है। इसे हर हाल में न्यूनतम करना होगा।
वर्ष 2024 में प्रदेश के 75 जिलों में सबसे ज्यादा 20 जिलों हरदोई, मथुरा, आगरा, लखनऊ, बुलन्दशहर, कानपुर नगर, प्रयागराज, सीतापुर, उन्नाव, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, बरेली, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, शाहजहांपुर, गोरखपुर, कुशीनगर, बदायूं, मेरठ और बिजनौर में दुर्घटनाओं से जनहानि हुई है। प्रदेश में कुल हुई दुर्घटना मृत्यु में 42 प्रतिशत इन जिलों से है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी विभाग आपसी समन्वय बनाकर सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करें। सभी मार्गों पर ब्लैक स्पाट को चिन्हित कर उन्हें ठीक कराएं। जिला स्तर पर प्रत्येक माह एवं मंडल स्तर पर त्रैमासिक मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक अनिवार्य रूप से हो।
प्रदेश के छह मंडलों अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी, आजमगढ़, सहारनपुर एवं आगरा मंडल में पिछले वर्ष हुई सिर्फ एक ही बैठक पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। बस्ती, लखनऊ, गोरखपुर और मीरजापुर में हुई चार बैठकों पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया।

