
सासाराम। महायोगी महामंडलेश्वर पायलट बाबा का मुंबई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है, जिससे इनके अनुयायियों में शोक की लहर है। पायलट बाबा को समाधि या अंत्येष्टि द्वारा मृत्यु का अभ्यास करने के लिए जाना जाता था। उन्होंने 1976 से अपने जीवन में 110 से अधिक बार प्रदर्शन किया है। 2007 में अर्धकुंभ में समाधि लगाने के लिए लाखों साधुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन गए थे। पायलट बाबा पहले भारतीय वायुसेना में एक विंग कमांडर रहे, लेकिन बाद में उन्होंने आध्यात्म को आगे बढ़ाने के लिए वीआरएस लिया। इसलिए उन्हें पायलट बाबा के नाम से प्रसिद्धि मिली।



पायलट बाबा का जन्म रोहतास जिले के नोखा प्रखंड के विशुनपुरा में हुआ था। वायु सेना में रहने के दौरान पायलट बाबा ने 1962 में भारत-चीन युद्ध में भाग लिया था। इसके अलावा, उन्होंने 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी लड़ाई लड़ी थी। ऐसा माना जाता है कि पायलट बाबा ने हिमालय की नादा देवी घाटी में 1 साल तक तपस्या की थी। आज दुनिया भर में उनके लाखों भक्त हैं और उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं। उनके कुछ लिखित साहित्य में कैलाश मानसरोवर, पर्ल्स आॅफ विजडम, डिस्कवर द सीक्रेट्स आॅफ हिमालय और अन्य शामिल हैं।
पायलट बाबा और उनके अनुयायियों ने भारत के अलावा कई देशों में आश्रम (आध्यात्मिक रिट्रीट या ध्यान केंद्र) स्थापित किए हैं। पायलट बाबा के निधन की खबर सुन रोहतास सहित देशभर एवं अन्य देशों में रह रहे उनके भक्त हरिद्वार के लिए रवाना हो गए हैं।
पायलट बाबा जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर रहे। पायलट बाबा का असली नाम कपिल सिंह था। पायलट बाबा का जन्म 15 जुलाई 1938 को बिहार के रोहतास जिले के बिशुनपुरा गांव में हुआ था। उन्होंने बीएचयू से एमएससी की पढ़ाई की और उसके बाद 1957 में भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
युद्ध की एक घटना ने अध्यात्म की तरफ मोड़ा : उनके जीवन की एक घटना ने उन्हें अध्यात्म की ओर मोड़ दिया। कहा जाता है कि एक बार उड़ान के दौरान उनका रेडियो संपर्क टूट गया था। तब उनके गुरु हरि बाबा उनके कॉकपिट में प्रकट हुए और उनके निर्देश पर ही उन्होंने विमान को सुरक्षित उतारा था। इस घटना ने उन पर गहरा प्रभाव डाला और उन्होंने 33 साल की उम्र में वायुसेना से सेवानिवृत्ति ले ली। वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे अध्यात्म की ओर झुक गए और पायलट बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। अपने अध्यात्मिक सफर के दौरान उन्होंने देश-विदेश में 100 से भी ज्यादा बार समाधि लगाई। पायलट बाबा के अनुयायियों ने विदेशों में भी कई आश्रम स्थापित किए। भारत में उनके प्रमुख आश्रम सासाराम, हरिद्वार, नैनीताल और उत्तरकाशी में हैं। इसके अलावा जापान और नेपाल में भी उनके आश्रम हैं।

