
नयी दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नौकरी के बदले जमीन मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनके बेटे तेजस्वी यादव और आठ अन्य आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को एक पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। पूरक आरोपपत्र विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष दाखिल किया गया, जिन्होंने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की। लैंड फॉर जॉब मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 1000 पेज की सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है ।
ईडी द्वारा पूरक आरोपपत्र दायर करने से लालू और तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं । जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला साल 2004 से 20009 तक रेल मंत्री के रूप में लालू यादव के कार्यकाल के दौरान एमपी के जबलपुर में रेलवे के पश्चिम-मध्य जोन में ग्रुप-डी में बहाली से जुड़ा है. आरोप है कि रेलवे में भर्ती होने वाले लोगों ने नौकरी के बदले आरजेडी सुप्रीमो के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों को उपहार स्वरूप जमीन दी थी।



जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला 2004 से 2009 तक रेल मंत्री के रूप में लालू के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे के पश्चिम-मध्य जोन में ग्रुप-डी में हुई भर्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि रेलवे में भर्ती होने वाले लोगों ने नौकरी के बदले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों को उपहार स्वरूप जमीन दी थी।
मामला साल 2004 से 2009 के बीच का है। यूपीए सरकार में लालू यादव रेल मंत्री थे। रेल मंत्री रहने के दौरान उनके परिवार को कथित तौर पर गिफ्ट में दी गई या बेची गई जमीन के बदले नौकरी में नियुक्तियों से जुड़ा मामला है। आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू और उनके कुछ खास लोग रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर जमीन का सौदा कर रहे थे. रेलवे में नौकरी रे लिए कई लोगों ने अपनी जमीन लालू यादव के परिवार या उनके करीबियों के नाम कर दी थी।
CBI ने किया था एफआईआर: इस मामले में ईडी सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ही जांच कर रही है. सीबीआई के एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि 2004-2009 तक जब लालू, यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे, तब उन्होंने मंत्री रहते हुए रेलवे के ग्रुप डी में जमीन लेकर नौकरियां दी थीं।

